जयपुर | 23 जून 2026, मंगलवार। जयपुर के मानसरोवर क्षेत्र में विराजमान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री तत्त्व रुचि जी तरुण ने श्रद्धालुओं की भक्ति और सेवा भावना से प्रभावित होकर मानसरोवर क्षेत्र को महाविदेह तुल्य बताया।
मंगलवार प्रातः वे अग्रवाल फार्म से विहार करते हुए न्यू सांगानेर रोड होते हुए इस्कॉन रोड स्थित अमृत नगर पहुँचे, जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने विहार सेवा का लाभ लिया। वर्तमान में उनका प्रवास धर्मेन्द्र जैन के निवास पर चल रहा है तथा 24 जून का प्रवास भी यहीं निर्धारित किया गया है।
अपने प्रवचन में मुनि श्री ने कहा कि क्रोध प्रेम और संबंधों का नाशक है, इसलिए इससे बचना चाहिए। उन्होंने क्रोध पर नियंत्रण के लिए दीर्घ श्वास, स्थान परिवर्तन और ठंडे पानी जैसे उपाय बताए।
इस अवसर पर मुनि श्री संभव कुमार जी ने कहा कि गुस्सा अधोगति का कारण बनता है और व्यक्ति को इससे दूर रहना चाहिए। कार्यक्रम का समापन मंगलपाठ के साथ हुआ।













देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत