मुंबई:कॉमरेड गोविंद पानसरे हत्याकांड को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की जांच राज्य सीआईडी से महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ता (एटीएस) को सौंपी जाएगी। न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख की खंडपीठ ने कहा कि कुछ एसआईटी सदस्य 2015 की हत्या की जांच में निरंतरता बनाए रखने के लिए एटीएस जांच का हिस्सा होंगे। दरअसल, पानसरे के परिवार ने याचिका दायर की थी कि जांच में प्रगति नहीं हो पाई है। एसआईटी लंबे समय के बाद भी हत्या के मास्टरमाइंड तक को नहीं ढूंढ पाई। इसलिए मामला महाराष्ट्र एटीएस को सौंप दिया जाना चाहिए।
यह याचिका पानसरे के परिजनों की ओर से दो याचिकाओं में दायर की गई थी। पानसरे के अलावा याचिका में नरेंद्र दाभोलकर की हत्या का भी जिक्र किया गया। बताया गया कि दाभोलकर की हत्या 2003 में की गई थी। इस मामले की जांच अदालत के निर्देश पर सीबीआई कर रही है। पारसरे के परिवार के सदस्यों ने कहा कि हालांकि अदालत को पहले सूचित किया गया था कि महाराष्ट्र में दो हत्याओं और कर्नाटक में एम एम कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्याओं में एक समान संबंध था, इसके बावजूद जांचकर्ता मास्टरमाइंड को खोजने में असमर्थ रहे हैं।
मास्टरमाइंड भी नहीं ढूंढ पाए
1 अगस्त को पहले की सुनवाई के दौरान, अभय नेवागी ने कहा कि 2019 में नालासोपारा हथियार बरामदगी मामले की जांच के दौरान सभी चार हत्याओं में एक समान लिंक पाया गया था, जिसकी जांच महाराष्ट्र एटीएस द्वारा की गई थी। उन्होंने अदालत को बताया कि एटीएस ने पाया था कि 2019 के मामले में एक आरोपी चारों हत्याओं में आम था, लेकिन वह मास्टरमाइंड नहीं था।
नेवागी ने कहा कि दाभोलकर हत्याकांड में शामिल शूटर शरद कलस्कर और सचिन अंदुरे को पानसरे मामले में गवाह के रूप में शामिल किया गया था। जबकि गौरी लंकेश और कलबुर्गी हत्या के मामलों में कुछ आरोपियों को भी नामित किया गया था। उन्होंने कहा कि तमाम कारणों के बावजूद पानसरे हत्याकांड की जांच का कोई तार्किक निष्कर्ष नहीं निकल पाया।
सीआईडी का पक्ष
सीआईडी का प्रतिनिधित्व करने वाले विशेष वकील वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक मुंदरगी ने वादी पक्ष की दलील पर जवाब दिया कि राज्य सरकार को मामले को एटीएस को स्थानांतरित करने में कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि सारंग अकोलकर और विनय पवार केवल दो आरोपी हैं जिन्हें पनसारे मामले में हत्यारोपी हैं और अन्य मामलों में उनका नाम नहीं है। मुश्किल यह है कि उन दोनों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
गौरतलब है कि गोविंद पानसरे और उनकी पत्नी को 16 फरवरी साल 2015 में कोल्हापुर में बदमाशों ने गोली मार दी थी। उस वक्त दोनों सुबह की सैर के लिए निकले थे। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता पानसरे ने गोलीकांड के चार दिन बाद मुंबई के एक निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया। हमले में उसकी पत्नी बाल-बाल बच गई थी।













देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत
