मुंबई:महाराष्ट्र में उद्धव सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। पहले उनके मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक को सलाखों के पीछे जाना पड़ा और अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में शिवसेना सांसद भावना गवली को तलब किया है। गवली को 5 मई को ईडी के अधिकारियों के सामने पेश होने को कहा गया है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले जांच एजेंसी ने गवली को तीन बार तलब किया था लेकिन वह पेश नहीं हो पाई थी। आखिरी समन 24 नवंबर, 2021 को जारी किया गया था। ईडी ने सितंबर, 2021 में गवली के करीबी सईद खान को गिरफ्तार किया था। नवंबर में आरोप पत्र दायर किया गया था और गवली की ओर से नियंत्रित एक एनजीओ के माध्यम से करोड़ों रुपए के लॉन्ड्रिंग का विवरण दिया गया था।
खान और महिला उत्कर्ष प्रतिष्ठान नाम के एनजीओ के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी। यवतमाल-वाशिम के सांसद की मां शालिनिताई गवली और खान कंपनी के निदेशक थे। ईडी अधिकारियों को ट्रस्ट को कंपनी में बदलने में जालसाजी का संदेह है। इसके अलावा, फर्म का धोखाधड़ी और धन की हेराफेरी के लिए इस्तेमाल किए जाने का भी संदेह है। सूत्रों के मुताबिक गवली से जुड़े ट्रस्ट में करीब 17 करोड़ रुपए की अनियमितता पाई गई।
हरीश सारदा नाम की एक सामाजिक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि भावना गवली ने बालाजी सहकारी पार्टिकल बोर्ड नाम की एक फर्म के जरिए से 43.35 करोड़ रुपए का ऋण लेकर राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) को चुना लगाया था। सारदा ने दावा किया कि भावना गवली ने एनसीडीसी से दस साल के लिए पैसा उधार लिया था लेकिन कंपनी वास्तव में कभी अस्तित्व में नहीं थी।
ईडी अधिकारियों ने उन दो ठेकेदारों से भी पूछताछ की, जिन्हें केंद्र सरकार के फंड और कोविड -19 राहत कोष से आदिवासी क्षेत्रों में भोजन किट उपलब्ध कराने के लिए सड़कों के निर्माण का काम दिया गया था।













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