डेस्क :विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर आक्रामक रुख अपना लिया है। सपा नेतृत्व का कहना है कि पार्टी अब “एक-एक वोट बचाने” की रणनीति पर काम करेगी। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं को साफ संदेश दिया है कि चुनाव जीतने के लिए मतदाता अधिकारों की रक्षा जरूरी है और इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर विधिक रास्ता भी अपनाया जाएगा।
पार्टी का मानना है कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। सपा के आंतरिक आकलन के मुताबिक, राज्य में करीब 20 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम हैं और लगभग 143 विधानसभा सीटों पर उनका प्रभाव है। इनमें से करीब 70 सीटों पर मुस्लिम आबादी 20 से 30 प्रतिशत के बीच है, जबकि 73 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाता 30 प्रतिशत से अधिक हैं। सपा का आरोप है कि फार्म-7 के माध्यम से फर्जी शिकायतें कर मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटवाने की कोशिश की जा रही है।
अखिलेश यादव ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर सपा का प्रतिनिधिमंडल लगातार चुनाव आयोग से शिकायत कर रहा है, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। उनका आरोप है कि इससे मुस्लिम मतदाताओं के साथ अन्याय हो रहा है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर किया जा रहा है।
पीडीए प्रहरी को मिली जिम्मेदारी
मतदाताओं के नाम कटने से रोकने के लिए सपा ने ‘पीडीए प्रहरी’ को सक्रिय कर दिया है। पार्टी का दावा है कि सवा करोड़ से अधिक वोट कटवाने की साजिश रची जा रही है। जिन इलाकों में फार्म-7 जमा किए गए हैं, वहां पीडीए प्रहरी जाकर जांच करेंगे कि शिकायतें सही हैं या नहीं। यदि किसी मतदाता का नाम जानबूझकर हटाया जा रहा पाया गया, तो उसे रुकवाने का प्रयास किया जाएगा और इसकी शिकायत जिला निर्वाचन अधिकारी से की जाएगी। साथ ही, इसकी रिपोर्ट पार्टी मुख्यालय भेजी जाएगी, जिसे मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष रखा जाएगा।
चुनाव आयोग पर तीखा हमला
अखिलेश यादव ने मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात ऐसे हो गए हैं कि चुनाव आयोग को भाजपा का पर्यायवाची मान लिया जाए। अखिलेश ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाएं लोकतंत्र की रक्षा करने के बजाय सत्ताधारी दल के हित में काम करती नजर आ रही हैं।
उन्होंने जनता को सचेत करते हुए कहा कि आज यदि वोट छीने जा रहे हैं, तो कल नागरिकों के अन्य अधिकार भी छीने जा सकते हैं। उनका कहना था कि यह खतरा सिर्फ किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी के लिए है और इससे लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर होगी।













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