बांदा:रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में भर्ती माफिया मुख्तार अंसारी की हालत में 14 घंटे बाद सुधार हो गया। उसे सर्जरी विभाग के आईसीयू में तीन डॉक्टरों के ऑब्जर्वेशन में रखा गया था। मंगलवार शाम 6.15 बजे उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। 6.35 बजे पुलिस-प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा के बीच उसे जेल में शिफ्ट करा दिया। इससे पहले मुख्तार से मिलने उसके बड़े भाई अफजाल अंसारी, बेटा उमर अंसारी और बहू निकहत भी पहुंचे। हालांकि केवल अफजाल अंसारी को ही मुख्तार से मिलने दिया गया। उमर अंसारी ने आरोप लगाया कि परमिशन होने के बाद भी पिता को देखने तक नहीं दिया गया।
सोमवार रात साढ़े 10 बजे मुख्तार के पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई। स्थिति चिंताजनक होने पर जेल प्रशासन ने जिला अस्पताल से डॉ. हृदेश्य पटेल, डॉ. एसडी त्रिपाठी और डॉ. शिशिर को बुलाया। डॉक्टर रात साढ़े 11 बजे पहुंचे लेकिन इलाज से लाभ नहीं मिला। इस पर उसे मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। मंगलवार तड़के 3:55 बजे उसे आईसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. सुनील कौशल ने हेल्थ बुलेटिन जारी कर बताया कि 62 वर्षीय मुख्तार को पेट में दर्द, मल त्यागने में दिक्कत और पेट फूलने की दिक्कत पर भर्ती कराया गया था।
मेडिसिन, सर्जरी और एनेस्थीसिया के तीन डॉक्टरों के ऑब्जर्वेशन में सर्जरी विभाग के आईसीयू में उसे रखा गया। हालत में सुधार होने पर मंगलवार शाम 6.15 बजे डिस्चार्ज कर दिया गया। उसका बीपी, शुगर नार्मल था। मल त्यागने में मुख्य समस्या थी, जिसमें उसे आराम मिल गया। एएसपी लक्ष्मी निवास मिश्र के मुताबिक शाम को मुख्तार को बांदा मंडल कारागार में शिफ्ट करा दिया गया।
उधर, हालत बिगड़ने की सूचना पर मंगलवार दोपहर मुख्तार के बड़े भाई अफजाल अंसारी, छोटा बेटा उमर अंसारी और विधायक बेटे अब्बास अंसारी की पत्नी निखत ने मेडिकल कॉलेज पहुंचे। इस दौरान पूरा मेडिकल कॉलेज पुलिस छावनी में तब्दील रहा। कई थानों की फोर्स चप्पे-चप्पे पर तैनात की गई थी। सुरक्षा की दृष्टि से आईसीयू के बाहर मौजूद तीमारदारों को कैंपस से बाहर कर दिया गया। यहां तक मेडिकल स्टाफ को भी जांच के बाद ही अंदर जाने दिया गया।













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