नई दिल्ली : दक्षिण अफ्रीका के उपराष्ट्रपति शिपोकोसा पॉलुस माशातिले ने मंगलवार को अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की। इससे पहले उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर भारत-दक्षिण अफ्रीका संबंधों को और मजबूत बनाने के विभिन्न उपायों पर चर्चा की।
विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्हें माशातिले से मुलाकात कर प्रसन्नता हुई। उन्होंने भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को और गहरा करने के प्रति माशातिले की प्रतिबद्धता की सराहना की।
वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा आधारभूत संरचना जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। साथ ही, दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी मिलकर कार्य करने पर सहमति व्यक्त की।
इससे पहले रविवार को दक्षिण अफ्रीका के उपराष्ट्रपति माशातिले और दक्षिण अफ्रीका की लघु व्यवसाय विकास मंत्री स्टेला टेम्बिसा न्दाबेनी-अब्राहम्स ने नई दिल्ली स्थित दिल्ली हाट का दौरा किया। 29 मई से 3 जून तक भारत की यात्रा पर आए प्रतिनिधिमंडल ने यहां भारत की सांस्कृतिक विविधता, हस्तशिल्प और उद्यमशीलता से जुड़ी गतिविधियों का अवलोकन किया।
माशातिले ने कहा कि दिल्ली हाट भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है, जहां देश के विभिन्न राज्यों की कला, संस्कृति, संगीत और नृत्य परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। उन्होंने बताया कि उनकी यात्रा का उद्देश्य यह समझना भी है कि भारत किस प्रकार लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहित करता है, डिजिटल अर्थव्यवस्था में नवाचार को बढ़ावा देता है और आधारभूत संरचना का विकास करता है।
उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल विभिन्न क्षेत्रों की भारतीय कंपनियों और संस्थानों से मुलाकात कर आर्थिक विकास के भारतीय मॉडल को समझने का प्रयास कर रहा है।
दक्षिण अफ्रीका के उपराष्ट्रपति शुक्रवार को छह दिवसीय कार्य यात्रा पर भारत पहुंचे थे। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग को नई ऊर्जा प्रदान करना और द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ बनाना है। अपने प्रवास के दौरान वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मुलाकात करेंगे। यात्रा कार्यक्रम में हैदराबाद के कुछ महत्वपूर्ण कार्यक्रम भी शामिल हैं, जिसके बाद 3 जून को प्रतिनिधिमंडल स्वदेश लौटेगा।













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