पटना: बिहार विधानसभा चुनावों से पहले सत्ताधारी गठबंधन NDA में खींचतान और अंदरूनी सियासी लड़ाई का असर दिल्ली और पटना तक साफ नजर आ रहा है। सीट बंटवारे को लेकर नाराज पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा अब दिल्ली पहुंचे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय और उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी रातभर उन्हें मनाने की कोशिश करते रहे, लेकिन कुशवाहा महुआ सीट पर अड़े रहे। बुधवार को उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी लंबी बातचीत की, लेकिन उनकी नाराजगी अभी तक दूर नहीं हुई है।
हालांकि कुशवाहा ने अमित शाह से मुलाकात के बाद इतना जरूर कहा कि बिहार में अगली सरकार NDA की ही बनेगी। सीटों के बंटवारे के अलावा उपेंद्र कुशवाहा महुआ सीट पर भी अड़े हुए हैं। रालोमो पार्टी को सिर्फ छह सीटें मिली हैं, जबकि चिराग पासवान को 29 सीटें दी गई हैं। कुशवाहा का कहना है कि महुआ सीट पर उनका दावा है, जबकि ये सीट सीट बंटवारे के तहत चिराग के खाते में गई है।
महुआ और दिनारा सीट पर कुशवाहा की नाराजगी
सीट बंटवारे को लेकर कुशवाहा सोशल मीडिया पर दो दिनों तक शायरी करते रहे। उनकी नाराजगी महुआ के साथ-साथ दिनारा सीट को लेकर भी है। कुशवाहा महुआ से अपने बेटे दीपक कुशवाहा और दिनारा से आलोक सिंह को उतारने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन ये दोनों सीटें चिराग के खाते में चली गईं। नाराज कुशवाहा की पार्टी के नेताओं ने NDA के नामांकन से दूरी बनाने की चेतावनी भी दी थी। न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, अंततः कुशवाहा महुआ सीट चिराग की झोली में डालने पर सहमत हो गए हैं, और बदले में उन्हें एक MLC सीट दी जाएगी।
नीतीश ने बढ़ाया चिराग का टेंशन
वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने 17 सीटों पर उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है। इनमें पांच ऐसी सीटें शामिल हैं, जिन पर जेडीयू और चिराग की लोजपा में संघर्ष मचा हुआ है—सोनबरसा, मोरवा, एकमा, गायघाट और राजगीर। जेडीयू ने इन सीटों पर भी उम्मीदवार उतार दिए हैं, जिससे चिराग पासवान के सामने मुश्किलें बढ़ गई हैं।
पहली सूची के उम्मीदवार और आगे की राह
जेडीयू ने सोनबरसा से रत्नेश सदा, मोरवा से विद्यासागर निषाद, एकमा से धूमल सिंह, गायघाट से कोमल सिंह और राजगीर से कौशल किशोर को उम्मीदवार बनाया है। यह पहली बार है जब नीतीश और उनकी पार्टी भाजपा के बराबर चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, नीतीश इस बात से भी नाराज हैं कि उनकी कुछ सीटें काटकर चिराग को दी गई हैं। NDA के लिए फिलहाल राहत यह है कि इन विवादित सीटों पर चिराग की पार्टी ने अभी तक उम्मीदवार नहीं उतारे हैं। पहले चरण के नामांकन की अंतिम तारीख 17 अक्टूबर है। अब राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि अमित शाह बिहार की यह सियासी जंग कैसे शांत करेंगे।













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