जयपुर: खाटू श्याम बाबा के लाखों को भक्तों को इंतजार रहता है कि कब वे अपने प्रभु का दर्शन करें, लेकिन जब बात हो उनके जन्मदिन की तो इस मौके पर सभी भक्त पहुंचना चाहते हैं। खाटू श्याम बाबा के जन्मोत्सव में झूमना चाहते हैं। मान्यता है कि बाबा खाटू श्याम के दरबार में जो भी भक्त अपनी मनोकामना या परेशानी लेकर जाता है वह निराश होकर नहीं लौटता। खाटू श्याम बाबा सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। आपको बता दें कि कलयुग के औतार खाटू श्याम बाबा का जन्मोत्सव अगले सप्ताह होगा। इस मौके पर यहां प्रसिद्ध लक्खी मेला भी लगता है। खाटू श्याम बाबा का लक्खी मेला फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष में लगता है। इस बार यह मेला 12 मार्च से शुरू हो रहा है और अगले 10 दिनों तक चलेगा।
खाटू श्याम बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने वाले लाखों भक्त लक्खी मेला में पहुंचते हैं। भक्तों की भारी भीड़ जुटने के अनुमान में मंदिर कमिटी ने व्यापक इंतजाम शुरू कर दिए हैं। राजस्थान सीकर जिले का प्रशासन और पुलिस सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद करना शुरू कर दिया है। आइए जानते हैं इस मेले से जुड़ी मान्यताएं –
खाटू श्याम लक्खी मेला 12 मार्च से 21 मार्च 2024 तक चलेगा।
खाटू श्याम के लक्खी मेले की मान्यताएं :
पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में जब महाभारत का युद्ध हो रहा था तब घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ने हारने वाले पक्ष को सहारा देने के संकल्प के निकले थे। भगवान कृष्ण को इस बात की जानकारी हुई तो उहोंने रास्ते में बर्बरीक को रोक लिया। भगवान कृष्ण ने पूछा कि तुम किस पक्ष से युद्ध लड़ोगे इस बर्बरीक ने कहा कि हारने वाले का साथ देंगे। चूंकि भगवान कृष्ण को मालूम था कि कौरव युद्ध में हारेंगे इसलिए उन्होंने बर्बरीक से छल से काम लिया। बर्बरीक महान दानी भी था। ब्राह्मण के भेष में भगवान कृष्ण ने बर्बरीक से दान में उनका शीश मांग लिया। इस बार बर्बरीक ने अपना शीट काटकर भगवान कृष्ण के चरणों में अर्पित कर दिया। ऐसा देखकर भगवान कृष्ण ने प्रसन्न होकर वरदान दिया कि तुम कलयुग में हारे का सहारा बनोगे और मेरे अवतार के रूप में पूजे जाओगे। यही कारण है कि आज बर्बरीक को खाटू श्याम के रूप में पूजा होती है। तभी से यह कहावत भी चल निकली – “हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा।” कहा जाता है कि इसी मान्यता के चलते यहां लक्खी मेला लगता है।












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