निर्माण नगर स्थित एक निजी विद्यालय में शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस के अवसर पर आयोजित धर्मसभा में जैन संतों ने “वसुधैव कुटुम्बकम्” अर्थात पूरे विश्व को एक परिवार मानने का संदेश दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं समाजजनों की उपस्थिति रही।
इस अवसर पर मुनि श्री तत्व रुचि जी “तरुण” ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव से पूरे विश्व को परिवार मानने की प्रेरणा देती आई है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी हमारा घर है और समस्त मानवता हमारा परिवार है। जब अपनत्व और भाईचारे की भावना विकसित होती है, तब आपसी मनमुटाव और कटुता स्वतः समाप्त हो जाती है।
मुनि श्री ने आगे कहा कि जिस प्रकार व्यक्ति अपने निजी परिवार की सुरक्षा, स्वच्छता और विकास का
ध्यान रखता है, उसी प्रकार समाज, संगठन, राष्ट्र और विश्व के प्रति भी जिम्मेदारी का भाव रखना चाहिए। सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, इसलिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाना समय की आवश्यकता है।
धर्मसभा में मुनि श्री संभव कुमार जी ने कहा कि मनुष्य अकेला जन्म लेता है और अकेला ही संसार से जाता है, लेकिन जीवन अकेले नहीं जी सकता। जीवन में अनेक लोगों का सहयोग जुड़ा होता है। उन्होंने परिवार में सुख-शांति और समरसता बनाए रखने के लिए प्रेम, विश्वास, सेवा-सहयोग और सहिष्णुता को आवश्यक बताया।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे पौधे को हरा-भरा रखने के लिए खाद, पानी, हवा और प्रकाश की आवश्यकता होती है, वैसे ही परिवार को मजबूत और खुशहाल बनाने के लिए इन चार गुणों का होना जरूरी है।
कार्यक्रम की शुरुआत तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ की स्तुति से हुई। इस दौरान तेरापंथ संगठन के संविधान का वाचन किया गया तथा श्रावक निष्ठा पत्र के संकल्पों को दोहराया गया। अंत में मंगल मंत्रोच्चार के साथ सभा का समापन हुआ।













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