स्पोर्ट्स डेस्क : अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने अपने शिक्षा एवं विकास कार्यक्रम को और विस्तार देते हुए वैश्विक स्तर पर क्रिकेट के प्रसार को नई गति दी है। इस पहल का उद्देश्य उभरते क्रिकेट देशों में खेल की समझ, प्रशिक्षण व्यवस्था और आधारभूत ढांचे को मजबूत करना है, जिससे क्रिकेट को अधिक व्यापक अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सके।
International Cricket Council द्वारा संचालित यह कार्यक्रम केवल कोचिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें खेल प्रशासन, तकनीकी प्रशिक्षण, जमीनी स्तर पर विकास और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने जैसे कई पहलू शामिल हैं।
ओलंपिक 2028 से पहले तेज हुई गतिविधियाँ
क्रिकेट वर्ष 2028 में लॉस एंजिल्स ओलंपिक में पुनः शामिल होने जा रहा है। इसे खेल के वैश्विक विस्तार के लिए एक ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए आईसीसी ने अपने विकास कार्यक्रमों को और तेज कर दिया है।
आईसीसी का मानना है कि ओलंपिक में क्रिकेट की वापसी से इसकी लोकप्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और यह खेल नई पीढ़ी के खिलाड़ियों एवं दर्शकों को व्यापक रूप से आकर्षित करेगा।
उभरते देशों पर फोकस
आईसीसी का शिक्षा कार्यक्रम विशेष रूप से उन देशों पर केंद्रित है जहाँ क्रिकेट अभी विकासशील अवस्था में है। एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका के कई क्षेत्रों में कोचिंग ढांचे को मजबूत करने, स्कूल स्तर पर क्रिकेट को बढ़ावा देने और स्थानीय प्रतिभाओं को तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इसके साथ ही डिजिटल प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म के माध्यम से दूर-दराज के क्षेत्रों तक क्रिकेट शिक्षा पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है।
महिला और युवा क्रिकेट को बढ़ावा
इस कार्यक्रम के तहत महिला क्रिकेट और युवा खिलाड़ियों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभिन्न प्रशिक्षण योजनाओं और प्रतियोगिताओं के माध्यम से अधिक से अधिक खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने की रणनीति अपनाई गई है।
वैश्विक विस्तार की दिशा में कदम
हाल के वर्षों में क्रिकेट की वैश्विक भागीदारी में वृद्धि देखी गई है। कई नए देशों ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। आईसीसी की यह पहल इस विस्तार को और मजबूत करने तथा खेल को अधिक देशों तक पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।













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