पालघर:चातुर्मास का महत्व जैन धर्म मे बताया गया है, अपनी शक्ति और भक्ति को जागृत करने का और उसे बढ़ाने का अवसर है चातुर्मास।
परमश्रद्धये श्री आचार्य श्री महाश्रमण जी की कृपा से पालघर मे डॉ साध्वी श्री पीयूष प्रभा जी चातुर्मास में धर्म ध्यान करवा रहे हैं। इसी क्रम में रविवारीय कार्यक्रम अंतर्गत साध्वी श्री ने सामुहिक भक्ताम्बर स्तोत्र का पाठ करवाया।
लाल सुंदरी से सजी बहनो एवं साध्वी श्री जी के साथ एक स्वर एक लय में भक्ताम्बर स्तोत्र के श्लोकों की तरगों से भवन तरंगित हो गया।
भक्ताम्बर स्तोत्र के महत्व को प्रकाशित करते हुए साध्वी श्री पीयूष प्रभा जी ने कहा भक्ताम्बर स्तोत्र आचार्य माँगतुंग द्वारा रचित एक शक्तिशाली स्तोत्र है। इसकी रचना मात्र से अड़तालीस तालों में कैद आचार्य माँगतुंग आजाद हो गए। आज भी इसका प्रभाव हम यंत्र-तंत्र देख सकते हैं। भक्ताम्बर स्तोत्र को कंठस्थ कर प्रतिदिन पाठ करके श्रावक अपने आपको शक्तिशील बनाए। साथ ही साध्वी श्री जी के सनिधि में राजेंद्र तलेसरा व भारती तलेसरा ने 9 की तपस्या के साथ उपस्थित हुए। तपस्या के उपलक्ष्य में साध्वी श्री जी ने कहा जब व्यक्ति का मनोबल दृढ़ होता है वह तपस्या में आगे बढ़ सकते हैं। सभी श्रावक अपने मनोबल को दृढ़ करते हुए अपने काया बल से तप करके कर्मो की निर्जरा करे। साध्वी श्री दीप्तियशा जी ने तप की अनुमोदना की। तप की अनुमोदना में सभा अध्यक्ष चतुर जी तलेसरा, परामर्शक नरेश जी राठौड, रमेश जी, हित, माही, रिदम व तलेसरा परिवार की बहनों ने गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में बोईसर, मनोर, सफाला, वानगांव, अहमदाबाद, सुरत से लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सभा मंत्री दिनेश राठौड़ ने किया। तपस्वियों का सम्मान तप द्वारा किया गया। यह जानकारी मीडिया प्रभारी योगेश राठौड़ ने दी।













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