भयंदर: तेरापंथ भवन, टेंबो रोड, भयंदर में आज पर्युषण पर्व के पांचवे दिन अणुव्रत दिवस के अवसर पर साध्वी पुण्य यशाजी
ने महत्वपूर्ण प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि साधुत्व का अनुसरण करते हुए व्यक्ति को अपनी आत्मा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि दूसरों की जीवन चर्या पर। आत्मा में रमण करने वाला व्यक्ति ही आनंद की अनुभूति कर सकता है। उन्होंने पांच इंद्रियों की महत्वपूर्णता पर भी प्रकाश डाला और कहा कि अवैध आचरण से आत्मा पर पाप लग जाते हैं, इसलिए आत्मा में लीन होकर अच्छे आचरण से पापों से मुक्ति की कोशिश करनी चाहिए।
साध्वी वर्धमान यशा जी ने अणुव्रत आंदोलन की स्थापना की बात आचार्य श्री तुलसी ने की और कहा कि अणुव्रत किसी जातीय बंधन से नहीं जुड़ा है। यह हर व्यक्ति को अच्छा जीवन जीने की प्रेरणा देता है। उन्होंने व्रतों को जीवन में सफलता प्राप्त करने का कवच बताया और समाज में रूढ़िवाद को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
युवक परिषद की प्रस्तुति पर भूपेंद्र वागरेचा ने कहा कि आचार्य श्री तुलसी ने तेरापंथ धर्मसंघ को कई महत्वपूर्ण अवदान दिए हैं, जिनमें अणुव्रत एक विशेष योगदान है। अणुव्रत के नियमों से आत्मानुशासन की प्रेरणा मिलती है और यह समाज के उत्थान में सहायक होता है।
साध्वी पुण्य यशा जी ने अणुव्रत के 11 नियमों की व्याख्या की, जिनमें प्राणातीपात, मृशावाद, अदत्तादान, मैथुन, परिग्रह, दिशी, उपभोग, अनर्थ दंड, सामायिक व्रत, देशावकाशिक और पौषध व्रत शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन नियमों का पालन कर व्यक्ति मानस परिवर्तन और समाज में सुधार ला सकता है।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों को जीवन में संयम और नैतिकता के महत्व को समझाने के लिए प्रेरित किया गया और संकल्प लिया गया कि शाकाहारी, अहिंसक और व्यसन-मुक्त समाज की रचना की जाएगी।













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