डेस्क : ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सीधा असर भारत के बासमती चावल निर्यात पर पड़ा है। अप्रैल महीने में बासमती शिपमेंट में लगभग 27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि घरेलू बाजार में कीमतें करीब 8 से 10 प्रतिशत तक गिर गई हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, निर्यात में यह गिरावट मुख्य रूप से ईरान और खाड़ी देशों की ओर होने वाली सप्लाई बाधित होने के कारण आई है। युद्ध के चलते समुद्री मार्गों में अस्थिरता, शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी ने व्यापार को और मुश्किल बना दिया है।
निर्यातकों का कहना है कि भारत के बासमती चावल के सबसे बड़े बाजारों में से एक ईरान है, लेकिन मौजूदा हालात में वहां तक माल पहुंचाने में देरी हो रही है या कई सौदे टल गए हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय मांग कमजोर हुई है और उसका सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में बासमती निर्यात घटकर लगभग 26–27 प्रतिशत नीचे आ गया, जबकि गैर-बासमती चावल की मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी रही। कुल मिलाकर चावल निर्यात में कुछ स्थिरता दिखी, लेकिन प्रीमियम बासमती सेगमेंट पर सबसे ज्यादा दबाव देखा गया।
घरेलू मंडियों में भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। मांग घटने और निर्यात सौदे रुकने के कारण बासमती की कीमतों में नरमी आई है, जिससे किसान और निर्यातक दोनों प्रभावित हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में हालात स्थिर नहीं होते, तब तक बासमती निर्यात और कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।













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