रांची/चतरा : झारखंड के चतरा जिले में सोमवार शाम एक दर्दनाक विमान हादसे ने सात जिंदगियां छीन लीं। रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एंबुलेंस शाम करीब 7:30 बजे सिमरिया के जंगल क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। विमान में सवार मरीज समेत सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। चतरा के पुलिस अधीक्षक सुमित अग्रवाल ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि उड़ान भरने के लगभग आधे घंटे बाद विमान का संपर्क टूट गया और बाद में उसके क्रैश होने की सूचना मिली।
विमान में गंभीर रूप से झुलसे मरीज संजय कुमार (40), उनकी पत्नी अर्चना देवी (35), भगीना ध्रुव कुमार (17), चिकित्सक डॉ. विकास कुमार गुप्ता, पारा मेडिकल कर्मी सचिन कुमार मिश्रा, पायलट विवेक विकास भगत और सह-पायलट सौराजदीप सिंह सवार थे। हादसे की खबर मिलते ही इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
जिंदगी की जंग हार गए संजय
लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड स्थित रखात गांव निवासी संजय कुमार पलामू के बकोरिया में ढाबा चलाते थे। चार दिन पहले उनके ढाबे में आग लगने की घटना में वे बिजली के करंट से गंभीर रूप से झुलस गए थे। उनका शरीर लगभग 65 प्रतिशत तक जल गया था। 16 फरवरी को उन्हें रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब दस दिनों तक चले उपचार के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ तो चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली रेफर किया।
परिवार ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की। रिश्तेदारों और परिचितों ने भी सहयोग किया, ताकि संजय की जान बचाई जा सके। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
उड़ान के दौरान टूटा संपर्क
एयर एंबुलेंस ने शाम 7:07 बजे रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी और रात करीब 10 बजे तक दिल्ली पहुंचने की संभावना जताई गई थी। यह रेडबर्ड एयरवेज का छोटा मेडिकल विमान था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उड़ान के दौरान खराब मौसम की स्थिति बनी हुई थी। बताया जा रहा है कि पायलट ने मार्ग परिवर्तन की अनुमति भी मांगी थी।
कुछ समय तक विमान का संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल से बना रहा, लेकिन बाद में संपर्क अचानक टूट गया। विमान वाराणसी और लखनऊ एटीसी से संपर्क स्थापित नहीं कर सका। अंतिम बार कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संवाद हुआ था। इसके बाद विमान का कोई सिग्नल नहीं मिला और चतरा के सिमरिया जंगल क्षेत्र में उसके दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई।
उठे कई सवाल, जांच की मांग
हादसे के बाद परिजनों ने उड़ान की अनुमति और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि मौसम प्रतिकूल था तो उड़ान की अनुमति क्यों दी गई। परिजनों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। रांची एयरपोर्ट के निदेशक विनोद कुमार ने कहा कि दुर्घटना के कारणों का स्पष्ट पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।
क्षेत्र में शोक का माहौल
हादसे में जान गंवाने वाले डॉ. विकास कुमार गुप्ता पूर्व में गारू और चंदवा में पदस्थापित रह चुके थे और उन्होंने प्रभारी चिकित्सक की जिम्मेदारी भी निभाई थी। इस त्रासदी ने एक परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया है।
जिस उड़ान से एक जीवन बचाने की उम्मीद थी, वही सात जिंदगियों का अंतिम सफर बन गई। संघर्ष, आशा और नियति के इस हृदयविदारक प्रसंग ने सभी को भीतर तक झकझोर दिया है।













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