डेस्क : शशि थरूर ने एक बार फिर अपने सधे हुए लेकिन तीखे शब्दों से पाकिस्तान की कूटनीति पर निशाना साधा है। ईरान और अमेरिका के बीच हुए अस्थायी युद्धविराम में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर थरूर ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि “ऐसे रिश्ते निभाना कोई पाकिस्तान से सीखे।”
थरूर का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान खुद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति दूत के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा है। बताया जा रहा है कि ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच इस्लामाबाद में बातचीत का दौर शुरू हुआ, जिसमें पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
हालांकि, कांग्रेस नेता का इशारा साफ था—उन्होंने बिना सीधे आरोप लगाए यह जताने की कोशिश की कि पाकिस्तान की यह “मध्यस्थता” कितनी निष्पक्ष है, यह सवालों के घेरे में है। थरूर का तंज दरअसल पाकिस्तान और अमेरिका के पुराने रिश्तों की ओर संकेत करता है, जिनमें रणनीतिक सहयोग और परस्पर हित हमेशा चर्चा का विषय रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि थरूर का यह बयान केवल एक टिप्पणी नहीं, बल्कि दक्षिण एशियाई कूटनीति के उस जटिल ताने-बाने की ओर इशारा है, जहां दोस्ती और रणनीति के बीच की रेखाएं अक्सर धुंधली हो जाती हैं।
वहीं, भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक संयमित रुख अपनाया है। आधिकारिक स्तर पर कोई तीखी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन वैश्विक मंच पर हो रही इन गतिविधियों पर नई दिल्ली की नजर बनी हुई है।
ईरान-अमेरिका युद्धविराम फिलहाल राहत की खबर जरूर है, लेकिन यह कितना टिकाऊ होगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। और इस बीच, पाकिस्तान की भूमिका—सवालों के साथ—चर्चा के केंद्र में बनी हुई है।













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