डेस्क : संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवतनेनी हरीश ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधारों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पाठ-आधारित (टेक्स्ट-बेस्ड) वार्ताओं की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने सुरक्षा परिषद सुधारों पर आयोजित अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) की बैठक में कहा कि संयुक्त राष्ट्र की अन्य प्रक्रियाओं की तरह ही यूएनएससी सुधारों पर भी लिखित मसौदे के आधार पर बातचीत होनी चाहिए।
हरीश ने आईजीएन के सह-अध्यक्षों द्वारा प्रस्तुत ‘एलिमेंट्स पेपर’ की आलोचना करते हुए कहा कि यह दस्तावेज़ सदस्य देशों के बीच स्थायी सदस्यता के विस्तार के पक्ष में मौजूद व्यापक समर्थन को सही ढंग से प्रतिबिंबित नहीं करता। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी सदस्यता की अवधारणा को लेकर किसी अतिरिक्त स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 23 इस विषय पर पूरी तरह स्पष्ट है।
उन्होंने कहा कि अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के पक्ष में व्यापक सहमति होने के बावजूद एलिमेंट्स पेपर में इसका पर्याप्त उल्लेख नहीं किया गया है। भारत का मानना है कि सुरक्षा परिषद की संरचना में सुधार के दौरान अफ्रीकी देशों को अधिक और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए।
भारतीय प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि दस्तावेज़ में स्थायी सदस्यता के विस्तार के समर्थन को केवल “महत्वपूर्ण संख्या में प्रतिनिधिमंडलों” तक सीमित बताकर प्रस्तुत किया गया है, जबकि वास्तविकता यह है कि अधिकांश सदस्य देश इस विस्तार के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि अफ्रीकी समूह, जी-4, एल-69 और कैरिकॉम जैसे समूहों ने लगातार सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के विस्तार का समर्थन किया है।
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधारों की वकालत करता रहा है। नई दिल्ली का तर्क है कि वर्तमान सुरक्षा परिषद द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों को दर्शाती है और आज की वैश्विक राजनीतिक, आर्थिक तथा जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं करती। भारत का कहना है कि विकासशील देशों की बढ़ती भूमिका और वैश्विक दक्षिण की आकांक्षाओं को देखते हुए सुरक्षा परिषद का विस्तार समय की आवश्यकता है।













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