अक्सर यह माना जाता है कि दिल की बीमारियाँ केवल वयस्कों या बुज़ुर्गों को होती हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान स्पष्ट करता है कि बच्चे भी हृदय संबंधी समस्याओं से प्रभावित हो सकते हैं। कुछ बीमारियाँ जन्म से होती हैं, जिन्हें जन्मजात हृदय रोग कहा जाता है, जबकि कुछ समस्याएँ बढ़ती उम्र, संक्रमण या जीवनशैली के कारण भी विकसित हो सकती हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के अनुसार हृदय रोग वैश्विक स्तर पर एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है, और बच्चों में भी समय पर पहचान न होने पर यह जटिल रूप ले सकता है। भारत में भी बाल-हृदय रोग के मामलों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
नीचे दिए गए छह संकेत ऐसे हैं, जिन्हें माता-पिता को बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए—
1. जल्दी थक जाना और खेलते समय सांस फूलना
यदि बच्चा सामान्य खेलकूद के दौरान ही अत्यधिक थक जाए या उसकी सांस तेज चलने लगे, तो यह हृदय की कार्यक्षमता में कमी का संकेत हो सकता है। खासकर छोटे बच्चों में यह लक्षण गंभीर हो सकता है।
2. होंठ या नाखून का नीला पड़ना
ऑक्सीजन की कमी के कारण होंठ, जीभ या नाखून नीले दिखाई देना हृदय या फेफड़ों की समस्या का संकेत हो सकता है। इसे चिकित्सकीय भाषा में सायनोसिस कहा जाता है।
3. बार-बार सीने में दर्द
बच्चों में सीने का दर्द सामान्य गैस या मांसपेशीय खिंचाव से भी हो सकता है, लेकिन यदि दर्द बार-बार हो रहा हो या खेलते समय बढ़ जाता हो, तो तुरंत जांच आवश्यक है।
4. वजन और लंबाई में अपेक्षित वृद्धि न होना
यदि बच्चा सही पोषण के बावजूद वजन या लंबाई में अपेक्षित वृद्धि नहीं कर पा रहा है, तो यह किसी आंतरिक स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है, जिसमें हृदय रोग भी शामिल है।
5. अत्यधिक पसीना आना
खासकर शिशुओं में दूध पीते समय या हल्की गतिविधि में भी अत्यधिक पसीना आना हृदय पर अतिरिक्त दबाव का संकेत हो सकता है।
6. बार-बार बेहोशी या चक्कर आना
यदि बच्चा अचानक चक्कर खाए या बेहोश हो जाए, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह हृदय की धड़कन की अनियमितता (अरिदमिया) का लक्षण हो सकता है।
किन बच्चों में अधिक जोखिम?
- जिनके परिवार में हृदय रोग का इतिहास हो
- जिनका जन्म समय से पहले हुआ हो
- गर्भावस्था के दौरान मां को संक्रमण या मधुमेह रहा हो
- जिन्हें बचपन में गंभीर वायरल संक्रमण हुए हों
क्या करें पेरेंट्स?
- नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं
- किसी भी असामान्य लक्षण पर बाल-हृदय विशेषज्ञ से परामर्श लें
- संतुलित आहार और शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं
- बच्चों को अत्यधिक जंक फूड से दूर रखें
समय पर पहचान और सही उपचार से अधिकांश बाल-हृदय रोगों का सफल प्रबंधन संभव है। माता-पिता की सतर्कता ही बच्चे के स्वस्थ भविष्य की सबसे बड़ी सुरक्षा है।
बच्चों की छोटी-छोटी शिकायतों को “सामान्य” समझकर टालना कभी-कभी भारी पड़ सकता है। इसलिए जागरूक रहें, सावधान रहें और आवश्यक होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।













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