वॉशिंगटन/नई दिल्ली:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान को लेकर बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि अमेरिका की 200 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी के बाद दोनों देशों ने संघर्ष विराम का निर्णय लिया था। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा।
ट्रंप के इन दावों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई हलचल पैदा कर दी है। एक ओर जहां पाकिस्तान ट्रंप के बयान का समर्थन करता नजर आया, वहीं भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत-पाक संघर्ष विराम पूरी तरह द्विपक्षीय था और इसमें किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं थी।
“200 फीसदी टैरिफ की धमकी के बाद हुआ सीजफायर” — ट्रंप
ट्रंप ने अपने बयान में कहा, “हमने कई युद्ध व्यापार के जरिए रुकवाए हैं। उदाहरण के तौर पर भारत और पाकिस्तान एक भीषण संघर्ष के मुहाने पर थे — 7 विमान गिराए गए थे, हालात बेकाबू हो रहे थे। तब मैंने दोनों देशों से कहा कि जब तक वे युद्ध नहीं रोकते, हम ट्रेड डील नहीं करेंगे। मैंने उन्हें चेतावनी दी कि अमेरिका उनके उत्पादों पर 200 फीसदी टैरिफ लगाएगा। अगले दिन दोनों देशों ने मुझसे कहा कि वे पीछे हट रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “मुझे युद्ध रोकना पसंद है। मैंने दोनों देशों के नेताओं से बात की — मुझे दोनों पसंद हैं, लेकिन मैंने साफ कर दिया था कि रास्ता यही है।”
भारत का जवाब — “संघर्ष विराम द्विपक्षीय निर्णय था”
भारत सरकार ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए कहा कि संघर्ष विराम पूरी तरह से भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय स्तर पर हुआ था। किसी तीसरे देश की भूमिका इसमें नहीं थी। यह बयान भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और स्वतंत्र विदेश नीति की पुनः पुष्टि करता है।
“मोदी मेरे मित्र हैं, भारत विश्वसनीय साझेदार है”
ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा, “मोदी महान व्यक्ति हैं। वे लंबे समय से भारत का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि पहले भारत में हर साल नया नेता आ जाता था। मुझे यह देखकर अच्छा लगता है कि मेरे मित्र इतने वर्षों से वहीं टिके हुए हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत एक “विश्वसनीय साझेदार” है। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “हां, बिल्कुल। वे (मोदी) मेरे मित्र हैं। हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं।”
रूसी तेल पर अमेरिकी दबाव
ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से बात की और उन्हें रूस से तेल नहीं खरीदने का आश्वासन मिला। उन्होंने कहा, “मैं इस बात से खुश नहीं था कि भारत तेल खरीद रहा है। लेकिन उन्होंने आज मुझे भरोसा दिलाया कि वे अब रूस से तेल नहीं खरीदेंगे।”
इस बीच, अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल की खरीद को लेकर 50 फीसदी टैरिफ लगा रखा है। भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उसे ऊर्जा खरीद के मामले में अनुचित रूप से निशाना बनाया जा रहा है।
ट्रंप ने कहा, “हम चाहते हैं कि चीन भी यही करे। भारत और चीन दोनों ही रूस से तेल खरीदने वाले बड़े देश हैं। मैंने पहले भी जी7 देशों से अपील की थी कि जो देश रूस से तेल खरीदते हैं, उन पर टैरिफ लगाया जाए।”
अमेरिकी अधिकारियों का रुख — “भारत अपनी राह चुनने के लिए स्वतंत्र है”
हाल ही में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा था कि भारत ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना शुरू कर चुका है। उन्होंने बताया, “भारत ने हाल के वर्षों में ही छूट पर रूसी तेल खरीदना शुरू किया था। यह भारतीय अर्थव्यवस्था का कोई आधारभूत हिस्सा नहीं है, और हमें लगता है कि वे इसे समझ रहे हैं।”
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने भी स्पष्ट किया, “हम दूसरे देशों को यह नहीं बताते कि वे किससे संबंध रखें या किससे नहीं। भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और अपने फैसले खुद लेता है।”
संक्षेप में, ट्रंप के बयानों ने भारत-अमेरिका संबंधों पर नई बहस छेड़ दी है — एक ओर वे खुद को शांति निर्माता और भारत के मित्र के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, तो दूसरी ओर भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और द्विपक्षीय निर्णयों पर किसी बाहरी दखल से इनकार कर रहा है।
क्या यह बयानबाज़ी अमेरिकी चुनावी रणनीति का हिस्सा है या वाकई भारत-अमेरिका संबंधों के नए समीकरण की झलक — यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत

