नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए हुए 60 दिन के शांति समझौते का कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं भी युद्ध होता है तो उसका सबसे बड़ा नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ता है, इसलिए किसी भी शांति पहल का समर्थन किया जाना चाहिए।
एएनआई से बातचीत में सुप्रिया श्रीनेत ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरी शांति प्रक्रिया में भारत की भूमिका दिखाई नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय नाविकों की मौत के मामले पर भी सरकार की प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं रही।
कांग्रेस नेता ने कहा कि “हम शांति का स्वागत करते हैं, लेकिन यह भी पूछना चाहते हैं कि भारत की इसमें कोई भूमिका क्यों नहीं दिखी?” उन्होंने आगे दावा किया कि एक बड़े शांति समझौते में पाकिस्तान की भूमिका सामने आना भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने उस घटना पर पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं दी, जिसमें उनके अनुसार भारतीय नाविकों की मौत हुई थी। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने विस्तृत आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की।
उधर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते की घोषणा करते हुए कहा कि यह पश्चिम एशिया में “शांति और सुरक्षा” स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और इससे रणनीतिक ऊर्जा मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को फिर से खोला जा सकेगा।
ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने भी इस समझौते की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि औपचारिक हस्ताक्षर समारोह शुक्रवार को स्विट्ज़रलैंड में होगा, जिसके बाद समझौते का विस्तृत मसौदा सार्वजनिक किया जाएगा।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका के साथ किसी भी स्थायी समझौते पर तभी आगे बढ़ेगा जब वह युद्धविराम, प्रतिबंधों में राहत और जमे हुए ईरानी संपत्तियों की वापसी जैसी शर्तों को पूरा करता है।













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