हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और इसकी चांदनी में दिव्य औषधीय गुण माने जाते हैं। शास्त्रों में यह रात्रि मां लक्ष्मी की आराधना और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अत्यंत फलदायी मानी गई है। मान्यता है कि इस रात में की गई पूजा, व्रत और उपाय विशेष फल प्रदान करते हैं।
शरद पूर्णिमा का महत्व
इस रात में आकाश से अमृत की वर्षा होती है और चंद्रमा की किरणें शरीर और मन दोनों को शांति प्रदान करती हैं। यह तिथि धन, वैभव, सुख और समृद्धि प्राप्त करने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसलिए इस अवसर पर मां लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान बताया गया है।
मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के खास उपाय
- लक्ष्मी पूजन करें
शाम को घर को साफ-सुथरा कर दीपक जलाएं। मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और कुबेर की प्रतिमा या चित्र के सामने धूप-दीप से पूजन करें। सफेद फूल, कमल और धान के नए दाने चढ़ाना शुभ माना जाता है। - शंख और घंटी बजाएं
शंखनाद और घंटनाद से वातावरण शुद्ध होता है। मां लक्ष्मी को यह ध्वनि प्रिय है और इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है। - चंद्रमा को अर्घ्य दें
शरद पूर्णिमा की रात दूध में मिश्री और चावल डालकर उसे चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें। यह उपाय स्वास्थ्य और सौभाग्य प्रदान करता है। - धन के स्थान पर दीपक रखें
घर के धन रखने वाले स्थान या तिजोरी के पास घी का दीपक जलाएं। इससे धन की वृद्धि और स्थिरता बनी रहती है। - गरीबों और ब्राह्मणों को दान करें
इस दिन वस्त्र, अन्न, दूध और मिठाई का दान करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। - रात्रि में खीर बनाकर रखें
परंपरा है कि इस रात दूध से बनी खीर को खुले आकाश तले रखकर चंद्रमा की किरणों से स्पर्श करवाया जाए और फिर परिवार व भक्तजन उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। इसे ‘अमृत खीर’ भी कहा जाता है।
निष्कर्ष
शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की आराधना से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस अवसर पर किए गए छोटे-छोटे उपाय जीवन की अनेक बाधाओं को दूर करते हैं और व्यक्ति के जीवन में स्थायी सुख और शांति का संचार करते हैं।













देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत
