डेस्क : भारत अपनी न्यूक्लियर ट्रायड के समुद्री घटक को अगले वर्ष और अधिक सुदृढ़ करने जा रहा है। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने मंगलवार को बताया कि देश की तीसरी परमाणु-संचालित बैलेस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) INS अरिदमन अंतिम परीक्षणों में है और शीघ्र ही नौसेना में शामिल की जाएगी। इसके शामिल होने से भारत की समुद्री परमाणु प्रतिरोधक क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी।
7000 टन क्षमता वाली नई पीढ़ी की SSBN
सूत्रों के मुताबिक, INS अरिदमन के बाद 7000 टन विस्थापन क्षमता वाली चौथी SSBN (कोडनेम S-4) भी 2027 तक बेड़े में आने की उम्मीद है। भारत की पहली दो SSBN—INS अरिहंत और INS अरिघाट—क्रमशः 2018 और 2024 में पूरी तरह परिचालन क्षमता हासिल कर चुकी हैं। इनका वजन करीब 6000 टन है।
INS अरिदमन में K-4 बैलेस्टिक मिसाइलों (3500 किमी रेंज) की दोगुनी पेलोड क्षमता होगी, जबकि INS अरिहंत वर्तमान में 750 किमी रेंज वाली K-15 मिसाइलों से लैस है। भविष्य में 5000–6000 किमी रेंज वाली K-5 और K-6 मिसाइलों के विकास पर भी कार्य किया जा रहा है।
रूस से 2027-28 तक मिलेगी SSN INS चक्र-3
भारत को समुद्री प्रतिरोधक ढांचे को मजबूत करने में एक और बढ़त रूस से मिलने वाली अकुला-क्लास SSN INS चक्र-3 के रूप में होगी। 2019 के 3 अरब डॉलर के समझौते के बावजूद रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते इसकी डिलीवरी अब 2027-28 के बीच तय मानी जा रही है। SSN पनडुब्बियों का उपयोग दुश्मन की पनडुब्बियों, युद्धपोतों और रणनीतिक लक्ष्यों पर लंबे दूरी से हमले के लिए किया जाता है।
न्यूक्लियर ट्रायड का तीसरा और सबसे सुरक्षित स्तंभ
भारत की न्यूक्लियर ट्रायड तीन घटकों पर आधारित है—
- भूमि आधारित अग्नि-सीरीज बैलेस्टिक मिसाइलें
- वायु आधारित डिलीवरी प्लेटफॉर्म (Su-30MKI, Mirage-2000, Jaguar, Rafale)
- समुद्री आधारित SSBN बेड़ा
इनमें समुद्री प्लेटफॉर्म को सबसे विश्वसनीय माना जाता है, क्योंकि SSBN महीनों तक बिना पकड़े समुद्र में गश्त कर सकती हैं और आवश्यकता पड़ने पर सटीक प्रतिघाती हमला करने में सक्षम होती हैं। भारत की नो-फर्स्ट-यूज नीति में SSBN को अंतिम और सबसे निर्णायक प्रतिरोधक क्षमता के रूप में देखा जाता है।
स्वदेशी SSN परियोजना में तेज़ प्रगति
अक्टूबर 2024 में CCS ने करीब 40,000 करोड़ रुपये की लागत से दो स्वदेशी SSN निर्माण को मंजूरी दी थी।
- प्रत्येक SSN का वजन लगभग 9800 टन होगा।
- इनमें 190 MW प्रेसराइज्ड लाइट-वॉटर रिएक्टर लगाए जाएंगे।
- पहली पनडुब्बी 2036–37, जबकि दूसरी लगभग दो वर्ष बाद शामिल होने की संभावना है।
चीन-अमेरिका के मुकाबले अभी भी सीमित बेड़ा
भारत की मौजूदा SSBN क्षमता अब भी अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों की तुलना में आधी है।
- चीन के पास वर्तमान में 6 जिन-क्लास SSBN और 6 SSN, जिनमें 10,000 किमी रेंज वाली JL-3 मिसाइलें शामिल हैं।
- अमेरिका के पास 14 ओहायो-क्लास SSBN और 53 SSN संचालित हैं।
भारत भविष्य में 13,500 टन क्षमता वाली अगली पीढ़ी की बड़ी SSBN विकसित करने की योजना पर भी कार्यरत है, जिनमें अधिक शक्तिशाली 190 MW रिएक्टर लगाए जाएंगे।
यदि आप चाहें, मैं इस rewritten समाचार का संक्षिप्त संस्करण, एडिटोरियल स्टाइल संस्करण, या टीवी पैकेज स्क्रिप्ट भी तैयार कर सकता हूँ।













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत

