• Latest
  • Trending
  • All
  • बिजनेस
सनातन धर्म के सशक्त, सामर्थ्यवान व् देदीप्यमान रक्षक: महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द महाराज

सनातन धर्म के सशक्त, सामर्थ्यवान व् देदीप्यमान रक्षक: महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द महाराज

July 13, 2022
उत्तम, मध्यम और अधम स्वभाव का भेद समझाया मुनि श्री ने प्रवचन में

उत्तम, मध्यम और अधम स्वभाव का भेद समझाया मुनि श्री ने प्रवचन में

April 17, 2026

भारत ने देख लिया, INDIA ने रोक दिया: महिला आरक्षण बिल पर बोले राहुल गांधी

April 17, 2026
बजट सत्र 2026 से पहले संसद में सर्वदलीय रणनीति बैठक

महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में अटका, नहीं मिला दो-तिहाई बहुमत

April 17, 2026
लोकसभा में गूंजा महिला आरक्षण, राहुल गांधी की टिप्पणी पर सदन में ठहाके

लोकसभा में गूंजा महिला आरक्षण, राहुल गांधी की टिप्पणी पर सदन में ठहाके

April 17, 2026
प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक पर सांसदों से की अपील, कहा—देश की आधी आबादी को मिलेगा हक

प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक पर सांसदों से की अपील, कहा—देश की आधी आबादी को मिलेगा हक

April 17, 2026
माँ स्वस्थ, बच्चा सुरक्षित: पोस्टपार्टम देखभाल की अहमियत

ममता पर मातम: मां ने 4 साल की बेटी की जान ली, खुद भी मौत की कोशिश

April 17, 2026
भाजपा का ‘वोटर जोड़ो’ अभियान: युवाओं और प्रवासियों पर फोकस

मतदान से पहले ही बढ़त: गुजरात में भाजपा का दबदबा, 700 से अधिक उम्मीदवार निर्विरोध

April 17, 2026
कांग्रेस ने स्पष्ट किया: अय्यर केरल के मुद्दों पर बोलते हैं व्यक्तिगत रूप से

पवन खेड़ा को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने असम जाने को कहा

April 17, 2026
प्रकाश राज

प्रकाश राज के खिलाफ रामायण पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर आपराधिक मामला दर्ज

April 17, 2026
राज्यसभा में फिर भरोसा: हरिवंश नारायण सिंह तीसरी बार उपसभापति निर्वाचित

राज्यसभा में फिर भरोसा: हरिवंश नारायण सिंह तीसरी बार उपसभापति निर्वाचित

April 17, 2026
पीओके को लेकर बड़ा दावा, बूरा नरसैया गौड़ बोले—सपना साकार होगा

पीओके को लेकर बड़ा दावा, बूरा नरसैया गौड़ बोले—सपना साकार होगा

April 17, 2026
बांग्लादेश बाहर, पाकिस्तान पर ICC की तलवार लटकी

विश्व कप 2026 में हलचल: न्यूजीलैंड–कनाडा मैच संदिग्ध, आईसीसी की जांच जारी

April 17, 2026
  • About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Friday, April 17, 2026
  • Login
ON THE DOT
  • मुख्य समाचार
  • देश
    • राज्य-शहर
  • विदेश
  • बिजनेस
  • मनोरंजन
  • जीवंत
  • ENGLISH
No Result
View All Result
ON THE DOT
  • मुख्य समाचार
  • देश
    • राज्य-शहर
  • विदेश
  • बिजनेस
  • मनोरंजन
  • जीवंत
  • ENGLISH
No Result
View All Result
ON THE DOT
No Result
View All Result
Home आराधना-साधना

सनातन धर्म के सशक्त, सामर्थ्यवान व् देदीप्यमान रक्षक: महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द महाराज

मासूमों का गला काट कट्टरवादी मज़हबी सिद्धांतों का प्रसारण 'धर्म' नहीं- स्वामी चिदम्बरानन्द

ON THE DOT TEAM by ON THE DOT TEAM
July 13, 2022
in आराधना-साधना, ओपिनियन
Reading Time: 1 min read
A A
0
सनातन धर्म के सशक्त, सामर्थ्यवान व् देदीप्यमान रक्षक: महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द महाराज

अपने पूरे जीवन को सनातन धर्म के लिए समर्पित करने वाले अनंत श्री विभूषित महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी महाराज, श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी का परिचय कराना मतलब सूरज को दीया दिखाने समान है। इनके मुखर स्वर, स्पष्टवादिता व् निर्भीक विचारों ने न जाने कितने ही लोगों का पथ प्रदर्शन किया है व् उन्हें अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने की प्रेरणा दी है। ‘ऑन द डॉट’ (On the Dot)  के प्रबंध सम्पादक ऋषभ शुक्ला से एक्सक्ल्यूसिव बातचीत के दौरान पूछे गये प्रश्नों का बेबाकी से जवाब देते हुए स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने जीवन व् आध्यात्मिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मात्र 11 वर्ष की आयु में अपने घर को छोड़ वे गुरु की शरण में आये। यहाँ उन्हें अपने गुरु परमपूज्य श्री स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज की सेवा का सौभाग्य प्राप्त हुआ। स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी महाराज ने इस दौरान सेवा, साधना व् स्वाध्याय को महत्व दिया और 05 वर्ष निरंतर चलती रही इस प्रक्रिया के बाद उन्होंने अकेले ही पूरे भारत में सनातन धर्म व् संस्कृति के प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया और इस दिशा में आगे बढ़े व वैश्विक स्तर पर अमेरिका और यूरोप में भी स्वामी जी ने भारी मात्रा में लोगों को सनातन धर्म से जोड़ा। इसके उपरांत मुंबई में ‘चिदध्यानम आश्रम’ की स्थापना की।

स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने आश्रम के विषय पर बात करते हुए कहा कि यहां हम प्रत्येक वर्ष मुंबई के सबसे बड़े वार्षिकोत्सव का आयोजन करते हैं जिसमें देशभर से संत, ऋषि आदि सम्मिलित होते हैं। हमने क्रिसमस के समय आश्रम का वार्षिकोत्सव मनाना आरम्भ किया… परिणाम ये हुआ कि क्रिसमस पर जहाँ भीड़ रहती थी, अब चार पाँच लोग रह गए और कथा में ढाई हज़ार से अधिक लोगों की भीड़ होती है। इसके अतिरिक्त घर वापसी (वैदिक पद्धति से धर्मांतरण) के इच्छुक अनेकों मुस्लिमों व ईसाइयों को खुले हृदय से सनातन धर्म में शामिल किया।

स्वामी जी ने आगे कहा, “सनातन धर्म के मूल तत्व को जन-जन तक पहुंचाया जाए, जिससे गौरवशाली सनातन संस्कृति का ज्ञान आने वाली पीढ़ी को भी प्राप्त हो व आज के इस भौतिकवादी युग में युवा पीढ़ी का आध्यात्मिक विकास हो, इन उद्देश्यों की पूर्ति हेतु वे सोशल मीडिया पर अनेकों वर्षों से तत्परता से कार्य कर रहे हैं जिसके फलस्वरूप आज लोग अध्यात्म व् हमारे सनातन धर्म को लेकर अधिक मुखर व् जागरूक हुए हैं। ये बदलाव सुखद है और यदि बोलूं कि इस बदलाव के स्तम्भों में एक सशक्त स्तम्भ मैं भी हूँ तो यह अतिशयोक्ति न होगा।”

‘हिंदुत्व को आप किस नज़रिये से देखते हैं? हिंदुत्व की अवधारणा को लेकर किस प्रकार की भ्रांतियों का प्रचार व् कुचक्र रचे जा रहे है?’ इन प्रश्नों का जवाब देते हुए स्वामी चिदम्बरानन्द जी महाराज ने कहा, “मूलतः हिन्दू धर्म सबकी शान्ति, विश्व के कल्याण की बात करता है ...’सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत’ अर्थात सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े। ऐसे विचार आपको संसार की किसी भी संस्कृति में देखने को नहीं मिलेंगे जहां चींटी से लेकर ब्रह्मा तक के कल्याण और सुखी होने की बात की गयी हो …हमारी मूलतः अवधारणा में कहीं कोई बंधन नहीं, हिंदुत्व का दायरा सीमित नहीं….हम सिर्फ मनुष्य ही नहीं बल्कि जीव-जंतुओं, पशु-पक्षियों के प्रति भी उदार हैं…. हम चींटियों मछलियों को भी भोजन कराते हैं …..सनातन धर्म हमें जानवरों को खाने की नहीं अपितु खिलाने की सीख देता है…सबके कल्याण और शान्ति के साथ दूसरा पक्ष यह भी है कि हमारी सनातन संस्कृति को नुकसान पहुंचाने व् अनादर करने की चेष्टा करने वालों को हम अस्वीकार करते हैं …हमने रावण को उसके घृणित कार्यों के लिए सबसे पहले शान्ति सन्देश ही दिया किन्तु उसने अपने आचरण में सुधार नहीं किया। परिणामस्वरूप हमने उसका संहार भी किया। कौरवों के पास भगवान कृष्ण स्वयं शान्ति दूत बनकर गए लेकिन जब वे नहीं माने तो उन दुराचारियों का विनाश करने पर भी संकोच नहीं किया। हिंदुत्व को लोगों ने बदनाम करने के भरकस प्रयास किये और जो ऐसा कर रहे थे वो विधर्मियों की भाषा बोल रहे थे। लेकिन वे ऐसा एक भी उदाहरण नहीं दे सकते जहां हमने धर्म के नाम पर मासूमों पर अन्याय किया हो, दंगा किया हो, रक्त बहाया हो। हिंदुत्व को बदनाम करने की जितनी भी कोशिश की जाए, वो निरर्थक ही साबित होती आयी है और निरर्थक ही साबित होती रहेगी।”

‘धर्म के नाम पर धर्म के ठेकेदार किस सन्देश को लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं और वे इसमें कितना सफल हो पा रहे हैं?’ इस प्रश्न के उत्तर में स्वामी चिदम्बरानन्द जी महाराज ने उदयपुर व् अमरावती में नृंशस हत्याओं के मामले में खेद जताते हुए कहा, “सर्वप्रथम हमें यह बात समझनी होगी कि धर्म ‘मज़हब’ नहीं ….धर्म ‘Religion’ नहीं ……

‘वेदप्रणिहितो धर्मो ह्यधर्मस्तद्विपर्यय:
वेदो नारायण: साक्षात् स्वयम्भूरिति शुश्रुम’

अर्थात वेदों ने जिन कर्मों का विधान किया है वे धर्म हैं और जिनका निषेध किया है वे अधर्म हैं। वेद स्वयं भगवान के स्वरूप हैं….. वे उनके स्वाभाविक श्वास प्रश्वास एवं स्वयं प्रकाश ज्ञान है। अब प्रश्न उठना स्वभाविक है कि क्या जो नृशंस हत्याएं उदयपुर, अमरावती में हुईं वो वेदों में लिखी गयी या धर्म इसकी अनुमति देता है? ऐसे कृत्य वेदों से सम्बंधित नहीं तो इस प्रकार की निंदनीय घटनाओं को अंजाम देने वालों का कोई धर्म नहीं… ऐसे लोगों की मान्यताएं, मज़हब, सम्प्रदाय हो सकते हैं पर ऐसे लोगों का धर्म नहीं होता… मज़हबी कट्टरवाद या मज़हबी मान्यताओं की पैरवी करने वाले लोग आखिर क्या पाना चाहते हैं, उनके सिद्धांत क्या हैं? हमारा सिद्धांत साफ़ है कि ‘परहित सरिस धर्म नहिं भाई परपीड़ा सम नहीं अधमाई’ अर्थात दूसरों की भलाई के समान दूसरा कोई धर्म नहीं है। जो व्यक्ति दूसरों को सुख पहुंचाता है, दूसरों की भलाई कर के प्रसन्न होता है, उसके समान संसार में कोई भी व्यक्ति सुखी नहीं है।

यहाँ वैचारिक अंतर को समझने की आवश्यकता है। हमारा धर्म दूसरों के हित की बात करता है इसके विपरीत वे मासूमों का गला काट के अपने कट्टरवादी मज़हबी सिद्धांतों को प्रसारित कर रहे हैं … इसके पीछे असल में वो क्या चाहते हैं, ये प्रश्न उठाना बेहद जरूरी हो गया है। यदि उनका ये मानना है कि मासूमों की गला रेत कर हत्या करने से उनका धर्म बचेगा तो ऐसी सोच से लैस मज़हब, सम्प्रदाय को पशुओं के समान ही कहा जाएगा। ‘यहाँ सिर्फ हमारा शासन होगा और विरोध करने वालों को मिलेगी तो सिर्फ मौत’- ये पशुओं की प्रवृत्ति है….मानवता ये नहीं, धर्म ये नहीं। अतः ऐसी प्रवृत्ति के लोगों का व् ऐसे सिद्धांतों का प्रशासनिक व् सामाजिक स्तर पर बहिष्कार किया जाना चाहिए व् दण्डित किया जाना चाहिये ताकि इस कट्टर मानसिकता से समाज व् देश को बचाया जा सके।

दूसरी बात बड़े ही स्पष्ट शब्दों में कहूँगा कि भारत 1400 वर्षों तक ग़ुलाम रहा, उस ग़ुलामी के समय में भी कोई भी हमारे साहस को परास्त नहीं कर सका तो आज भी कोई भी ताकत हमारे भीतर डर पैदा नहीं कर सकती….हमने 1400 वर्षों की परतंत्रता के वक़्त अनगिनत मौतें देखीं, उसके बावजूद हमारी सनातन संस्कृति सशक्त है और लोगों को ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर बढ़ने की प्रेरणा दे रही है। वर्तमान समय में भी अनेकों अत्याचारों के ख़िलाफ़ हम आवाज़ बुलंद कर रहे हैं… गलत कहने वालों और करने वालों का बहिष्कार हो रहा है। हम साहस से धर्म की स्थापना हेतु निरन्तर अधर्मियों के विरुद्ध युद्ध लड़ रहे हैं। हमारा जागरूक होना, जागना ही हिंदुत्व और देश के लिए सबसे बड़ी जीत है।”

प्रश्न पूछे जाने पर कि हिन्दू देवी-देवताओं को मज़ाक का विषय बनाना, उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना वर्षों से चला आ रहा है…बात चाहें चित्रकार एम् एफ हुसैन की हो या स्वप्रचारित कॉमेडियंस की, देश किस दिशा में आगे बढ़ रहा है और इस कुत्सित मानसिकता की जड़ क्या है?  स्वामी चिदम्बरानन्द जी महाराज ने कहा, “जड़ की बात करूँ तो 1400 वर्षों की परतंत्रता से जितना नुकसान हमारे देश को हुआ उससे कहीं अधिक स्वतंत्रता के बाद बनी हमारी सरकारों व् नेताओं की लालच व् कुत्सित सोच के कारण हुआ। 1947 के बाद बहुसंख्यक हिन्दुओं को प्रताड़ित किया गया, इतिहास को विखंडित किया गया, हमारे गौरवशाली इतिहास के चीथड़े उड़ा कर उन्होंने मुगलों को महान बताया ….इसके बाद अल्पसंख्यकों के नाम पर व् मज़हबी उन्माद व् राजनीतिक तुष्टिकरण की प्रवृत्ति ने इन बातों को बढ़ावा दिया… बहुसंख्यकों के विरुद्ध षड़यंत्र रच कर उनको नगण्य बनाया गया, संत समाज का दूषित प्रचार किया गया… फिल्म, कला, साहित्य लगभग हर माध्यम के द्वारा सनातन धर्म के प्रत्येक आस्था के केंद्र पर आघात किया गया। न सिर्फ देवी- देवताओं पर बल्कि संतों, कथानकों, इतिहास, रामायण, महाभारत, तीर्थ स्थलों का अपमान किया गया…. ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य समाज को दुराचारी दिखाया गया व् शूद्रों को प्रताड़ित। परतंत्र भारत के स्वतन्त्र होते ही सरकार आपकी थी, शासन आपका था, फिर कैसे आपने शूद्रों पर अत्याचार होने दिया? इतने वर्षों में दलित उत्पीड़न के नाम पर सिर्फ समाज में ज़हर घोला गया। हमारी सनातन संस्कृति तो कहती है कि हमारे भगवान राम शबरी की कुटिया में जाते हैं और जूठे बेर खाते हैं। ऐसी अनेकों कथाओं को दबाया गया। हमें मुखर होने से रोका गया, दब्बू बनाया गया जिसके फलस्वरूप विद्रोहियों को सनातन धर्म को अपमानित करने का हौसला मिला। ऐसे लोगों को तत्कालीन शासन तंत्र ने न सिर्फ खुली छूट दी बल्कि ऐसे अधर्मियों को पुरस्कार प्रदान किया गया, उन्हें सम्मानित किया गया। 2014 के बाद समय बदला। शासन व्यवस्था में बदलाव आया। आज लोग मुखर हो रहे हैं.. कॉमेडियंस, लेखक, वेब सिरीज़, फिल्म्स आदि के द्वारा सनातन धर्म को अपमानित करने की चेष्टा करने पर सोशल मीडिया पर लोग आवाज़ उठा रहे हैं, जो गलत है उसका बहिष्कार किया जा रहा है….यह बदलाव निःसंदेह सकारात्मक है।”

सनातन धर्म अपने अनुयायियों को प्रश्न करने की पूरी आज़ादी देता है लेकिन आज इस आज़ादी का उपयोग कुछ हिन्दू फ़ोबिया से ग्रसित लोगों द्वारा अपने एजेंडा पूरा करने के लिए हो रहा है। देश में फैलते इस धीमे ज़हर का कोई मारक (एंटीडोट) नहीं? इस प्रश्न का जवाब देते हुए स्वामी जी ने कहा, “वामपंथी विचारधारा के लोगों ने रोटी, कपड़ा, मकान को इस प्रकार प्रचारित किया कि लोग अपना जीवन जीना ही भूल गए। इसका सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ कि हमने अपने धर्म ग्रंथों से दूरी बना ली। हिन्दू धर्म को अफ़ीम बताया गया और इससे बचने की जद्दोजेहद सबसे ज्यादा हिन्दुओं ने की। इसके विपरीत मुस्लमान व् ईसाई अपने ग्रंथों से जुड़े रहे। धर्म कोई नशा नहीं… धर्म सुलाता नहीं बल्कि हमें जगाता है। हमारे शास्त्रों के अनुसार धर्म दृष्टि है। धर्म के बिना व्यक्ति उचित अनुचित में अंतर स्पष्ट ही नहीं कर सकता। हमारे सनातन धर्म में हर प्रश्न का जवाब है…. आप प्रश्न कीजिये…. हमें हिन्दू फ़ोबिया के ग्रसित लोगों से कोई परेशानी नहीं …आप बीमार हैं …आप उसके इलाज के लिए सनातन धर्म को समझिये… आपके हर संदेह, प्रश्न का तार्किक उत्तर आपको मिल जाएगा। असल में हमें जरूरत है संस्कारों की शिक्षा पद्धति में सुधार की। बच्चों को धर्म ग्रन्थ पढ़ने की शिक्षा दें। उन्हें सनातन धर्म से अवगत कराएं।”

देश में किस प्रकार के बदलाव की आवश्यकता है? इस प्रश्न पर स्वामी चिदम्बरानन्द जी महाराज ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, “बदलाव की लहर 2014 के बाद से देखने को मिल रही है … यह बदलाव सकारात्मक है, लोग जाग रहे हैं पर उनकी संख्या बढ़नी चाहिए। हमारे देश में लोकतंत्र है, राजतंत्र नहीं, हिटलर शाही नहीं। लोकतंत्र में वोट की ताकत होती है…हमारे धर्म के प्रति आस्था रखने वाले लोगों को सही सरकार का चुनाव करना होगा। उस शासन व्यवस्था को हर बार स्थापित करना होगा जो सनातन धर्म के लिए आवाज़ मुखर करे। अपने आप को व् देश को बचाने के लिए जागरण ही सबसे बड़ा माध्यम है। शिक्षा, कला, साहित्य, फिल्म, टी.वी, रेडियो के माध्यम से सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार आवश्यक है। लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुझसे एक व्यक्ति ने पूछा कि लव जिहाद का कारण क्या है….क्या आधुनिक शिक्षा पद्धति ने हमारे संस्कार ख़त्म कर दिए हैं इसलिए वे कहीं भी शादी के लिए तैयार हो जाते हैं? इसका उत्तर देते हुए मैंने उनसे कहा कि शिक्षापद्धति के कारण यदि हमारी लड़कियाँ लव जिहाद का शिकार हो रहीं या धर्मांतरण हो रहा तो उन्हीं स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाली मुस्लिम लड़कियाँ क्यों नहीं बहकती? अपनी भूल को दूसरे के सिर मढ़ना छोड़ना होगा व् बच्चों को बचपन से धार्मिक संस्कार देने होंगे। जहाँ भी विधर्मी आचरण देखें उसका प्रतिकार करने का साहस हमें करना होगा। देशवासियों से यही कहूँगा कि सत्य को समझे, बहकावे में न आएं….भ्रमित न हों… कोई भी विचलित करने वाली बात सामने आती है तो उसका अन्वेषण करें, परखें और पूरा सच जानने समझने के बाद ही विश्वास करें। देश और धर्म को बचाना है तो जागृति आवश्यक है। मंगल कामनाएं।”

Tags: DharmaGuru purnimaOn the dot exclusiveon the dot ezineOn the dot Hindion the dot newsSanatan DharmaSwami Chidambaranand Saraswati
Previous Post

वो ही गुरु और गुरूर भी वो ही… संजय राउत ने गुरुपूर्णिमा पर किया ट्वीट

Next Post

दवा-पेट्रोल को तरसते, जान गंवाते लोग, मुखिया ने भी छोड़ा साथ; श्रीलंका की तबाही की कहानी

Next Post
आर्थिक संकट के बीच श्रीलंका में भारी विरोध

दवा-पेट्रोल को तरसते, जान गंवाते लोग, मुखिया ने भी छोड़ा साथ; श्रीलंका की तबाही की कहानी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • उत्तम, मध्यम और अधम स्वभाव का भेद समझाया मुनि श्री ने प्रवचन में
  • भारत ने देख लिया, INDIA ने रोक दिया: महिला आरक्षण बिल पर बोले राहुल गांधी
  • महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में अटका, नहीं मिला दो-तिहाई बहुमत
  • लोकसभा में गूंजा महिला आरक्षण, राहुल गांधी की टिप्पणी पर सदन में ठहाके
  • प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक पर सांसदों से की अपील, कहा—देश की आधी आबादी को मिलेगा हक
Stock Market Today by TradingView
  • About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Call us: +91 98330 26960
No Result
View All Result
  • मुख्य समाचार
  • देश
    • राज्य-शहर
  • विदेश
  • बिजनेस
  • मनोरंजन
  • जीवंत
  • ENGLISH

Copyright © 2020 ON THE DOT

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In