डेस्क: महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपनी संगठनात्मक मजबूती और चुनावी पकड़ का प्रदर्शन किया है। रविवार को घोषित नतीजों में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने 200 से अधिक सीटों पर जीत या बढ़त दर्ज कर स्पष्ट बढ़त बना ली है। कुल 288 नगर परिषद और नगर पंचायतों के परिणाम सामने आ चुके हैं, जिनमें भाजपा 129 सीटों पर जीत या बढ़त के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।
महायुति के अन्य सहयोगियों में शिवसेना (शिंदे गुट) ने 51 और एनसीपी (अजित पवार गुट) ने 33 सीटों पर जीत या बढ़त हासिल की है। इसके मुकाबले विपक्षी महाविकास अघाड़ी को महज 52 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है। चुनावी नतीजों के बाद कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) की ओर से परिणामों पर सवाल खड़े किए गए हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस जीत को भाजपा की सकारात्मक राजनीति और विकास एजेंडे का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने किसी भी राजनीतिक दल या नेता पर व्यक्तिगत आरोप लगाने के बजाय सरकार की योजनाओं और नीतियों को जनता के सामने रखा। फडणवीस के अनुसार, यह पहली बार था जब प्रचार पूरी तरह सकारात्मक रखा गया और मतदाताओं ने उसी पर भरोसा जताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार भी जताया।
फडणवीस ने यह भी दावा किया कि नगर निकाय चुनावों में भाजपा ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। उनके मुताबिक, लगभग 48 प्रतिशत पार्षद भाजपा के सिंबल पर चुने गए, जबकि 129 नगर परिषदों में भाजपा समर्थित उम्मीदवार अध्यक्ष बने हैं। उन्होंने इस प्रदर्शन का श्रेय पार्टी संगठन की मजबूती और सरकार के विकासोन्मुखी कामकाज को दिया।
वहीं, विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया अलग रही। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने पार्टी के विजयी उम्मीदवारों को बधाई देते हुए राज्य चुनाव निकाय पर परोक्ष टिप्पणी की। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने महायुति की जीत पर ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष पैसे की “बारिश” का मुकाबला नहीं कर सका। वहीं, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने भी सत्ताधारी दलों पर “पैसे और बाहुबल” के इस्तेमाल का आरोप लगाया।
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों के नतीजे राज्य की राजनीति में महायुति की मजबूत स्थिति और विपक्ष के सामने खड़ी चुनौतियों को रेखांकित करते हैं। इन नतीजों को आने वाले समय में राज्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम संकेत माना जा रहा है।













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