नई दिल्ली:पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने दिसंबर तिमाही के जीडीपी आंकड़ों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि भारत के ताजा जीडीपी आंकड़े पूरी तरह रहस्यमयी हैं और इन्हें समझ पाना मुश्किल है। बता दें कि वित्त वर्ष 2023-24 की तीसरी तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 8.4 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। ये आंकड़े तमाम अनुमानों से बेहतर हैं और पिछले डेढ़ साल में सबसे अधिक हैं।
क्या कहा अरविंद सुब्रमण्यन ने
अरविंद सुब्रमण्यन ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में कहा- मैं आपको ईमानदारी से बताना चाहता हूं कि ताजा जीडीपी आंकड़ों को मैं समझ नहीं पा रहा हूं। मैं पूरे सम्मान के साथ कहना चाहता हूं कि ये बिल्कुल रहस्यमयी हैं। वे मेल नहीं खाते हैं। मुझे नहीं पता कि उनका क्या मतलब है। सुब्रमण्यन ने कहा कि इन आंकड़ों में ‘निहित मुद्रास्फीति’ एक से 1.5 प्रतिशत है जबकि अर्थव्यवस्था में वास्तविक मुद्रास्फीति तीन से पांच प्रतिशत के बीच है।
उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था 7.5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, भले ही निजी खपत तीन प्रतिशत बढ़ी है। सुब्रमण्यन ने कहा कि ताजा आंकड़ों में गलती और चूक की गणना नहीं की गई है जबकि वास्तव में वित्त वर्ष 2023-24 के लिए अनुमानित 7.6 प्रतिशत वृद्धि में ये लगभग 4.3 प्रतिशत हैं।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर क्या बोले
पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने कहा, ”तो ऐसे कई आंकड़ें हैं… जिन्हें मैं समझ नहीं पाता। मैं यह नहीं कह रहा कि ये गलत हैं। इसके बारे में फैसला दूसरों को करना है।” उन्होंने इस बात पर आश्चर्य जताया कि यदि भारत इतना आकर्षक स्थान बन गया है, तो प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में तेजी से बढ़ोतरी क्यों नहीं हो रही है। सुब्रमण्यन ने कहा कि निजी निवेश, कॉरपोरेट निवेश वर्ष 2016 के स्तर से काफी नीचे है।













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