डेस्क : बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी में उठे विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। पार्टी नेतृत्व ने दो बड़े नेताओं पर कड़ा कदम उठाते हुए पूर्व विधायक छत्रपति यादव और एआईसीसी सदस्य आनंद माधव को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। पार्टी का आरोप है कि ये दोनों नेता पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे।
बिहार कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव यादव ने बताया कि गहन जांच और रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर की गई है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, चुनाव के दौरान टिकट बंटवारे में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए आनंद माधव के नेतृत्व में सदाकत आश्रम में प्रदर्शन किया गया था। इसके अलावा, पूर्व प्रत्याशी गजानंद शाही, छत्रपति यादव, नागेंद्र प्रसाद, विकल्प रंजन सिंह, बच्चू प्रसाद सिंह, राजकुमार राजन और बंटी चौधरी सहित कई नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्ण अल्लावारु, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और शकील अहमद खान पर टिकट वितरण में गड़बड़ी और संगठन को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।
इन नेताओं ने दावा किया कि चुनावी टिकटों का वितरण मेहनती और जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर, सिफारिश और धनबल वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देते हुए किया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी ने राहुल गांधी के निर्देशों की अवहेलना करते हुए निजी स्वार्थ के लिए यह कदम उठाया। उनका यह भी कहना था कि टिकट सूची तैयार करते समय संगठन की राय को नजरअंदाज किया गया और क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान नहीं रखा गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस कार्रवाई से कांग्रेस में अनुशासन कायम करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन पार्टी के भीतर और बाहरी विरोधाभासों को पूरी तरह शांत करना चुनौतीपूर्ण रहेगा।













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