दोहा : अमेरिका और ईरान के बीच हुए बहुप्रतीक्षित शांति समझौते का सोमवार को विश्व नेताओं ने स्वागत किया और इसे पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कूटनीतिक उपलब्धि बताया। माना जा रहा है कि यह समझौता न केवल क्षेत्रीय तनाव को कम करेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पुनः पूरी तरह खोलने तथा लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न आर्थिक दबावों को कम करने में भी सहायक होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित इस समझौते को पाकिस्तान की मध्यस्थता और कतर, सऊदी अरब तथा तुर्किये के सहयोग से अंतिम रूप दिया गया। समझौते के बाद कतर, तुर्किये, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस सहित अनेक देशों के नेताओं ने इसकी सराहना करते हुए सभी पक्षों से इसे पूरी निष्ठा के साथ लागू करने और संवाद के माध्यम से स्थायी शांति स्थापित करने का आह्वान किया।
कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली वार्ताएँ सकारात्मक और रचनात्मक वातावरण में आगे बढ़ेंगी।
कतर के विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी कर समझौता ज्ञापन को “स्थायी शांति को सुदृढ़ करने तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने वाला महत्वपूर्ण कदम” बताया। मंत्रालय ने पाकिस्तान सहित सभी मध्यस्थ देशों की भूमिका की सराहना की, जिन्होंने दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने और समझौते तक पहुँचने में योगदान दिया।
तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने इस घटनाक्रम को क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया जिस समाचार की लंबे समय से प्रतीक्षा कर रही थी, वह अब वास्तविकता बनता दिखाई दे रहा है। एर्दोआन ने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की उकसावे वाली गतिविधियाँ इस सकारात्मक माहौल को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने पाकिस्तान, कतर और सऊदी अरब के कूटनीतिक प्रयासों की विशेष रूप से प्रशंसा की।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस समझौते को युद्ध की समाप्ति, क्षेत्रीय स्थिरता की बहाली और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पुनः खोलने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप तथा मध्यस्थ देशों को बधाई देते हुए कहा कि समझौते का पूर्ण और प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार प्राप्त नहीं करने दिए जाने चाहिए।
स्टार्मर ने यह भी कहा कि ब्रिटेन तकनीकी वार्ताओं और समुद्री सुरक्षा अभियानों में सहयोग देने के लिए तैयार है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर समुद्री मार्गों से बारूदी सुरंगों को हटाने जैसे प्रयास भी शामिल हो सकते हैं।
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने भी इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे वैश्विक महत्व की कूटनीतिक सफलता बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता विश्व अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान कर सकता है और मध्य पूर्व को अधिक सुरक्षित बनाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने समझौते को शीघ्र लागू करने पर बल देते हुए होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बिना किसी शर्त और प्रतिबंध के तत्काल खोलने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि फ्रांस और ब्रिटेन समुद्री यातायात को सामान्य बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में सहयोग देने को तैयार हैं।
मैक्रों ने यह भी कहा कि यह समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं और व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर आगे की वार्ताओं का आधार बनना चाहिए।
इन प्रतिक्रियाओं से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूर्ण हो चुका है। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत बताते हुए वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए सकारात्मक संकेत बताया।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने, जिनकी सरकार ने मध्यस्थता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बताया कि गहन कूटनीतिक वार्ताओं के बाद दोनों पक्ष स्थायी रूप से सैन्य अभियान समाप्त करने पर सहमत हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस समझौते के अंतर्गत लेबनान से संबंधित सैन्य गतिविधियों को भी समाप्त करने पर सहमति बनी है।
शहबाज शरीफ के अनुसार, समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे। उन्होंने कतर, सऊदी अरब और तुर्किये को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए बताया कि हस्ताक्षर समारोह से पहले कई प्रारंभिक बैठकें आयोजित की जाएँगी, जिनमें समझौते के क्रियान्वयन और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा होगी।
इस सप्ताह औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित होने वाला यह समझौता पश्चिम एशिया में तनाव कम करने, वैश्विक व्यापार मार्गों को पुनर्जीवित करने और दीर्घकालिक क्षेत्रीय शांति एवं आर्थिक स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।













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