वाशिंगटन: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि आत्मनिर्भर भारत न तो ‘पृथकतावाद’ है और न ही ‘संरक्षणवाद’, बल्कि यह इस तथ्य की स्वीकार्यता है कि भारत को जीडीपी में अपनी विनिर्माण हिस्सेदारी बढ़ानी चाहिए। सीतारमण ने यहां प्रतिष्ठित ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में व्यापक तौर पर औद्योगिकीकरण नहीं हुआ क्योंकि इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी की कमी थी।
सीतारमण ने मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी आत्मनिर्भर भारत परियोजना के संदर्भ में कहा कि हम पिछले आठ साल से इसी कमी को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत को अलगाववाद या संरक्षणवाद के रूप में गलत समझा जाता है। यह इस तथ्य की मान्यता है कि भारत को सकल घरेलू उत्पाद का अपना विनिर्माण हिस्सा बढ़ाना चाहिए क्योंकि यह कुशल और अर्धकुशल दोनों के लिए रोजगार पैदा करता है।
उन्होंने कहा कि सड़क और हाईवे का निर्माण कार्य तेज कर दिया गया है। बंदरगाहों और रेल नेटवर्क को मजबूत किया गया है। सरकार के पूंजीगत व्यय में वृद्धि का उद्देश्य निजी क्षेत्र को वैश्विक विनिर्माण क्षमता बनाने के लिए बुनियादी ढांचा मंच प्रदान करना था। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को लेकर सीतारमण ने कहा कि, वैश्विक विकास और व्यापार परस्पर जुड़े हुए हैं। व्यापार के लिए नई विश्व व्यवस्था में विकास का समर्थन करने के लिए, हमें अनिवार्य रूप से सीमाओं के पार चलने के लिए माल और सेवा आपूर्ति श्रृंखला की आवश्यकता है। सीतारमण ने कहा कि प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना स्थानीय स्तर पर वैश्विक क्षमता बनाने के बारे में है। यह हमें आपूर्ति-श्रृंखला के लचीलापन का एक उपाय प्रदान करते हुए भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में प्लग करना चाहते है।
वहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण के साथ मुलाकात में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव जेनेट एल येलेन ने घोषणा की कि वो जी20 की बैठकों से पहले नवंबर में, अमेरिका-भारत आर्थिक और वित्तीय भागीदारी की बैठक में भाग लेने के लिए ट्रेजरी सचिव के रूप में अपनी पहली भारत यात्रा करेंगे।













देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत
