डेस्क : करीब 36 वर्ष पुराने चर्चित सरला भट्ट दुष्कर्म और हत्या मामले में जम्मू-कश्मीर की राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने प्रतिबंधित संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक समेत पांच आरोपियों के खिलाफ 737 पृष्ठों का आरोपपत्र दाखिल किया है। आरोपपत्र दाखिल होने के साथ ही मामले में विशेष अदालत में मुकदमे की सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।
एसआईए ने आरोपपत्र श्रीनगर की विशेष टाडा अदालत में प्रस्तुत किया है। जांच एजेंसी ने यासीन मलिक को इस वारदात का मुख्य साजिशकर्ता बताया है। आरोपपत्र में खुर्शीद अहमद चाल्कू, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी उर्फ इदरीस तथा गुलाम मोहम्मद टपलू को भी आरोपी बनाया गया है। इनमें से तीन आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि एक के पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में छिपे होने की जानकारी दी गई है।
जांच के अनुसार, वर्ष 1990 में श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसकेआईएमएस) में कार्यरत नर्स सरला भट्ट का ड्यूटी समाप्त होने के बाद अपहरण कर लिया गया था। आरोप है कि उन्हें बंधक बनाकर यातनाएं दी गईं, दुष्कर्म किया गया और बाद में गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनका शव बाद में श्रीनगर के एक इलाके से बरामद हुआ था। शव के पास मिले एक हस्तलिखित नोट में उन्हें कथित तौर पर पुलिस का मुखबिर बताया गया था, लेकिन एसआईए ने अपनी जांच में इस दावे के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही है।
एसआईए का कहना है कि यह हत्या कोई अलग-थलग घटना नहीं थी, बल्कि 1990 के दौर में कश्मीरी पंडित समुदाय के बीच भय का वातावरण पैदा करने और उन्हें घाटी छोड़ने के लिए मजबूर करने की एक व्यापक साजिश का हिस्सा थी। जांच के दौरान गवाहों के बयान, फोरेंसिक साक्ष्य, चिकित्सकीय रिपोर्ट तथा अन्य दस्तावेजी प्रमाण जुटाए गए, जिनके आधार पर आरोपपत्र तैयार किया गया।
करीब साढ़े तीन दशक तक लंबित रहने के बाद अब यह मामला अदालत में विचारण के लिए पहुंचेगा। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।













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