गुवाहाटी: असम विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा (Bharatiya Janata Party) ने अपनी नजर प्रमुख रूप से लगभग 40 रणनीतिक सीटों पर टिकाई है। पार्टी का मानना है कि इन सीटों में स्थानीय पहचान और क्षेत्रीय मुद्दे उसका पक्ष मजबूत कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, भाजपा का जोर ऊपरी असम के जिलों पर है, जहां मूल असमवासियों की संख्या अधिक है और अवैध प्रवासियों का मुद्दा स्थानीय राजनीति में संवेदनशील बना हुआ है। इन इलाकों में पार्टी पिछले चुनाव में मिली सफलता और स्थानीय अभियान—जैसे भूमि विवादों का समाधान और अवैध निवासियों की पहचान—को आधार बनाकर रणनीति तैयार कर रही है।
बीजेपी संगठन ने भी अपने उम्मीदवारों में बदलाव किया है। कई मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दिया गया है ताकि एंटी‑इनकंबेंसी यानी जन शिकायतों का असर कम किया जा सके। इन रणनीतिक सीटों में शिवसागर, जोरहाट, डिब्रूगढ़, धेमाजी, गोलाघाट, लखीमपुर, तिनसुकिया और बिस्वनाथ शामिल हैं।
विपक्षी दल—विशेष रूप से कांग्रेस—भी इन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास में जुटा है। कांग्रेस ने स्थानीय दलों और जातीय परिषदों के साथ गठबंधन कर चुनावी रणनीति को व्यापक किया है।
चुनावी माहौल अब जोरों पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है, और ग्रामीण इलाकों, चाय‑बागानों और शहरों में रैलियों के माध्यम से अपने अभियान को गति दी जा रही है। भाजपा का लक्ष्य तीसरी बार सत्ता में वापसी है और इसके लिए यह 40 रणनीतिक सीटों पर विशेष ध्यान दे रही है।













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