नई दिल्ली : उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि दुनिया में भारत के मुकाबले कोई देश नहीं है। भाषा की समृद्धि की बात करें तो हम एक अद्वितीय राष्ट्र हैं। हमारे यहां कई भाषाएं हैं। राज्यसभा का चेयरमैन रहते हुए मुझे ये अवसर मिला कि हमारे सदस्य अलग-अलग 22 भाषाएं बोल सकें। उन्होंने इस अवसर को हाथ से जाने नहीं दिया। मैं जब उनको अपनी भाषा में भाषण देते हुए सुनता हूं तो ट्रांसलेशन तो सुनता ही हूं, पर उनकी बॉडी लेंग्वेज ही मुझे बता देती है कि वो क्या बोल रहे हैं। मैं उनकी बात को समझ सकता हूं, वे बेस्ट हैं। इसीलिए इस देश में तीन दशक के बाद बहुत बड़ा क्रांतिकारी कदम आया है। वो है राष्ट्रीय शिक्षा नीति। इसमें मातृभाषा पर बहुत जोर दिया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर बोले जगदीप धनखड़
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आगे कहा कि मातृभाषा अलग है क्योंकि यह वह भाषा है जिसमें हम सपने देखते हैं। मैं उन राज्यों से अपील करता हूं जिन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को नहीं अपनाया है कि वे पुनर्विचार करें और फिर से विचार करें क्योंकि यह नीति एक गेम-चेंजर है। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम की अध्यक्षता के दौरान ये अपील की। उन्होंने इस अवसर पर देशवासियों से एक ऐसा संकल्प लेने का आह्वान किया, जिसके अंतर्गत सभी शिक्षित व्यक्ति कम से कम एक अशिक्षित व्यक्ति को पढ़ाने का काम करें।













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