ओटावा:कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने आज अपनी पार्टी, लिबरल पार्टी ऑफ कनाडा, के नेता पद से इस्तीफा देने की घोषणा की, जिससे उनके नौ वर्षों के कार्यकाल का अंत हो गया। उन्होंने बताया कि वह तब तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे जब तक उनके उत्तराधिकारी का चयन नहीं हो जाता।
ओटावा स्थित रिड्यू कॉटेज के बाहर मीडिया को संबोधित करते हुए ट्रूडो ने कहा, “मैंने अपनी पार्टी और गवर्नर को सूचित कर दिया है कि मैं पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना चाहता हूं। यह निर्णय मेरे उत्तराधिकारी के नियुक्त होते ही प्रभावी होगा।”
53 वर्षीय ट्रूडो ने कहा कि उनका नेतृत्व “संसद में गतिरोध” का सामना कर रहा है। उन्होंने संसद को 24 मार्च तक स्थगित करने की घोषणा की ताकि नए नेता के चयन की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा किया जा सके।
चुनावी सुधार पर अफसोस
अपने कार्यकाल पर विचार करते हुए ट्रूडो ने कहा, “मुझे इस बात का अफसोस है कि मैं देश की चुनावी प्रणाली को बदल नहीं पाया। मतदाताओं को बैलट पर अपने दूसरे और तीसरे विकल्प चुनने का अधिकार मिलना चाहिए था, ताकि ध्रुवीकरण को रोका जा सके और एकजुटता को बढ़ावा मिल सके।”
ट्रूडो के संभावित उत्तराधिकारी
लिबरल पार्टी के नए नेता के तौर पर इन प्रमुख चेहरों के नाम चर्चा में हैं:
- डोमिनिक लेब्लांक, अंतरसरकारी मामलों और वित्त मंत्री।
- मेलानी जोली, विदेश मंत्री और मॉन्ट्रियल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली सांसद।
- फ्रांस्वा-फिलिप शैंपेन, नवाचार, विज्ञान और उद्योग मंत्री।
- मार्क कार्नी, बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड के पूर्व गवर्नर।
लिबरल पार्टी के भीतर असंतोष
पिछले कुछ महीनों में ट्रूडो के नेतृत्व पर उनकी पार्टी के अंदर ही सवाल उठने लगे थे। जनमत सर्वेक्षणों में विपक्षी कंजरवेटिव पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता ने पार्टी में असंतोष को और तेज कर दिया। वरिष्ठ नेताओं, जैसे सीन केसी और चंद्र आर्या ने सार्वजनिक रूप से ट्रूडो से इस्तीफा देने की मांग की थी।
दिसंबर 2024 में डिप्टी प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड के इस्तीफे ने इस असंतोष को चरम पर पहुंचा दिया। उन्होंने ट्रूडो पर “राजनीतिक नौटंकी” करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह प्रभावी नीति निर्माण पर ध्यान नहीं दे रहे।
आर्थिक और कूटनीतिक चुनौतियां
ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान कनाडा को आर्थिक मंदी, उच्च महंगाई, और अमेरिकी टैरिफ की धमकियों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके इस्तीफे के बाद कनाडाई डॉलर, जो लगातार गिर रहा था, में मजबूती आई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, भारत के साथ ट्रूडो के रिश्ते तनावपूर्ण रहे। 2023 में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के लिए भारत पर लगाए गए आरोपों के कारण दोनों देशों के बीच संबंध बिगड़ गए। आलोचकों ने ट्रूडो पर खालिस्तानी समर्थकों को राजनीतिक लाभ के लिए खुश करने का आरोप लगाया।
विपक्ष पर तीखा हमला
अपने इस्तीफे के दौरान ट्रूडो ने विपक्षी नेता पियरे पोइलियावरे पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “जलवायु परिवर्तन से लड़ाई बंद करना और विविधता के मूल्य से पीछे हटना सही रास्ता नहीं है।”
आगे का रास्ता
लिबरल पार्टी को 90 दिनों के भीतर नया नेता चुनना होगा, जो अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करेगा। इस साल के अंत में होने वाले आम चुनाव तक यही नेता पार्टी और देश का नेतृत्व करेगा।
ट्रूडो का इस्तीफा कनाडाई राजनीति में एक नया अध्याय खोलता है, जहां देश आर्थिक सुधार और कूटनीतिक तनाव जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है।













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