नई दिल्ली : पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ से जुड़ा एक कथित बयान सामने आने के बाद राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने वैश्विक व्यापार और टैरिफ नीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि रूस से तेल की खरीद बंद की जाए, तो संबंधित देशों पर लगाए जा रहे टैरिफ में राहत दी जा सकती है।
इस टिप्पणी के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा कूटनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हुई हैं और कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वैकल्पिक रणनीति अपना रहे हैं।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में रूस से सस्ते कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है, जिसे सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक बताया है। हालांकि, पश्चिमी देशों की ओर से इस नीति पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
पूर्व सीजेआई के इस कथित बयान पर आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत संदर्भ सामने नहीं आया है, लेकिन इसे लेकर विभिन्न वर्गों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ इसे वैश्विक व्यापार की वास्तविकताओं से जुड़ी टिप्पणी मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे भू-राजनीतिक दबावों के संदर्भ में देख रहे हैं।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर भारत की ऊर्जा नीति, रूस से तेल आयात और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों के बीच संतुलन को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।













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