नई दिल्ली:गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में लागू किए गए तीनों नए कानूनों ने भारत को एक नए युग में प्रवेश दिलाया है। भारत मंडपम में आयोजित “न्याय प्रणाली में विश्वास का स्वर्णिम वर्ष” कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि इन कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद तीन साल के भीतर नागरिकों को न्याय मिलना सुनिश्चित होगा।
शाह ने कहा कि आम जनता में अब एफआईआर को लेकर डर नहीं बल्कि ‘एफआईआर से न्याय मिलेगा’ का विश्वास बढ़ेगा। उन्होंने इस पहल को आजादी के बाद का सबसे बड़ा सुधार करार देते हुए कहा कि यह बदलाव न केवल कानूनी प्रणाली को पारदर्शी और लोकोपयोगी बनाएगा, बल्कि समयबद्ध न्याय को भी संभव करेगा।
व्यापक प्रशिक्षण और ई-साक्ष्य की तैयारी
गृह मंत्री ने बताया कि पिछले एक वर्ष में देशभर में इस नई व्यवस्था को लागू करने की दिशा में बड़ा प्रशिक्षण अभियान चलाया गया है।
- 14.80 लाख पुलिसकर्मियों,
- 42 हजार जेल कर्मचारियों,
- 19 हजार से अधिक न्यायिक अधिकारियों और
- 11 हजार से अधिक अभियोजकों को प्रशिक्षित किया गया है।
ई-साक्ष्य और डिजिटल न्याय प्रणाली की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
- 23 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में क्षमता निर्माण पूरा कर लिया गया है।
- 11 राज्यों ने ई-साक्ष्य और ई-समन,
- 6 राज्यों ने ‘न्याय श्रुति’
- और 12 राज्यों ने सामुदायिक सेवा से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी है।
राज्यों से सहयोग की अपील
अमित शाह ने कहा कि कानूनों के सफल क्रियान्वयन के लिए सिर्फ पुलिस या गृह मंत्रालय की भूमिका पर्याप्त नहीं, बल्कि आम जनता को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाना जरूरी है। इसके लिए उन्होंने सभी राज्यों से सक्रिय भागीदारी की अपील की।
दोषसिद्धि दर में होगा बड़ा सुधार
तकनीक के बेहतर उपयोग के चलते शंका का लाभ लेकर बच निकलने वाले अपराधियों की संभावना अब समाप्त होगी, जिससे दोषसिद्धि की दर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति बेहतर होगी। शाह ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय से युक्त शासन का एक नया स्वर्णिम कालखंड प्रारंभ होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में जब इन कानूनों की समीक्षा होगी, तो इन्हें “आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा रिफॉर्म” कहा जाएगा।













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