श्रावण मास, जो भगवान शिव को अर्पित है, इस वर्ष अत्यंत शुभ संयोगों के साथ प्रारंभ हो रहा है। 11 जुलाई से आरंभ हो रहा यह मास सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग तथा आयुष्मान योग जैसे अत्यंत फलदायी योगों के संगम में प्रवेश करेगा। धर्मशास्त्रों में इन योगों को जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आयु वृद्धि का सूचक माना गया है। यह माह संपूर्ण रूप से साधना, भक्ति और शिव-अनुशासन का अवसर प्रदान करता है।
श्रावण मास का पुण्यकाल
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, श्रावण मास की तिथि 10 जुलाई की मध्यरात्रि 1:48 बजे से प्रारंभ मानी जा रही है। चूंकि सनातन परंपरा में तिथि की गणना उदया तिथि के अनुसार की जाती है, अतः इसका विधिवत आरंभ 11 जुलाई, शुक्रवार से होगा। इस दिन तीन विशेष योगों की उपस्थिति इस मास के आध्यात्मिक प्रभाव को और भी अधिक तीव्र कर देती है।
महादेव को समर्पित सावन
हिंदू धर्म में सावन का महीना अत्यंत पुण्यदायक और महादेव की कृपा प्राप्ति का श्रेष्ठ अवसर माना गया है। इस काल में श्रद्धालु शिवालयों में जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक के माध्यम से भगवान शिव की आराधना करते हैं। संपूर्ण मास शिवपुराण का श्रवण, महामृत्युंजय जाप तथा विविध अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य आत्मिक उन्नति और जीवन के समस्त संकटों का निवारण होता है।
सावन सोमवार का व्रत: श्रद्धा और संकल्प का प्रतीक
श्रावण मास में आने वाले सोमवारों का विशेष महत्व है। इस वर्ष भक्तों को चार सोमवारों का अवसर प्राप्त होगा:
- 14 जुलाई – पहली सोमवारी (सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति और आयुष्मान योग सहित)
- 21 जुलाई – दूसरी सोमवारी
- 28 जुलाई – तीसरी सोमवारी
- 4 अगस्त – चौथी एवं अंतिम सोमवारी
मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और इच्छित फल प्रदान करते हैं। विशेषकर इस वर्ष की पहली सोमवारी अत्यंत विशेष है, जिसमें तीनों शुभ योग एक साथ संयोग बना रहे हैं।
शिव पूजन की विशेष सामग्री और उसका महत्व
- चमेली के पुष्प – वाहन सुख के लिए
- कनेर के पुष्प – सुंदर वस्त्रों की प्राप्ति हेतु
- लाल धतूरा – पुत्र कामना के लिए
- दूर्वा (दुब) – उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु हेतु
- कमल, शंखपुष्प एवं बेलपत्र – आर्थिक समृद्धि के लिए
इन सभी सामग्रियों का शिव पूजन में प्रयोग साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और इच्छित फल की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
श्रावण मास की प्रमुख तिथियाँ
| तिथि | अवसर | दिन |
|---|---|---|
| 11 जुलाई | सावन आरंभ (तीन शुभ योग) | शुक्रवार |
| 14 जुलाई | पहली सोमवारी | सोमवार |
| 21 जुलाई | दूसरी सोमवारी | सोमवार |
| 28 जुलाई | तीसरी सोमवारी | सोमवार |
| 04 अगस्त | चौथी एवं अंतिम सोमवारी | सोमवार |
| 09 अगस्त | सावन पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन | शनिवार |
श्रावण मास केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण, संयम और श्रद्धा का संगम है। यह काल भक्त के लिए तप, त्याग और तन्मयता के माध्यम से शिवत्व की ओर अग्रसर होने का श्रेष्ठ अवसर है। भक्तिपूर्वक इस मास का पालन करने से न केवल लौकिक इच्छाओं की पूर्ति होती है, अपितु अध्यात्मिक उन्नति का द्वार भी खुलता है।












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