डेस्क:सीरिया में ड्रूज़ समुदाय और सरकारी बलों के बीच जारी हिंसक संघर्ष के बीच बुधवार को सीरियाई गृह मंत्रालय और एक प्रमुख ड्रूज़ धर्मगुरु द्वारा एक नया संघर्षविराम घोषित किया गया। हालांकि, इस युद्धविराम की स्थिरता पर संदेह बना हुआ है क्योंकि इससे पहले मंगलवार को घोषित समझौता कुछ ही घंटों में टूट गया था।
स्वैदा शहर से सरकारी सेनाओं के काफिले पीछे हटने लगे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कि यह समझौता टिक पाएगा या नहीं। ड्रूज़ समुदाय के सम्मानित नेता शेख हिकमत अल-हिजरी ने इस नए समझौते से खुद को अलग कर लिया है।
इस बीच, इस्राइल ने संघर्षविराम के बावजूद सीरियाई राजधानी दमिश्क़ पर हवाई हमले जारी रखे। मंगलवार रात इस्राइल ने दमिश्क़ के मध्य स्थित सीरियाई रक्षा मंत्रालय पर हमला किया, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और 34 घायल हुए। एक अन्य हमला राष्ट्रपति भवन के पास के पहाड़ी क्षेत्र में हुआ।
इस्राइली रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज़ ने कहा कि “अब हम दर्दनाक प्रहारों की शुरुआत कर चुके हैं” और यह चेतावनी दी कि यदि सीरियाई सेना पीछे नहीं हटी तो जवाबी कार्रवाई और तेज़ होगी। इस्राइल ने ग़ोलान हाइट्स से सटे सीरियाई इलाक़े में मौजूद इस्लामी चरमपंथियों को अपनी सीमाओं से दूर रखने के लिए यह अभियान शुरू किया है।
स्वैदा में जारी संघर्ष की शुरुआत स्थानीय सुन्नी बदूई जनजातियों और ड्रूज़ लड़ाकों के बीच अपहरण और हमलों की श्रृंखला से हुई थी। हालात बेकाबू होने पर सीरियाई सरकार ने सेना भेजी, लेकिन इन बलों पर नागरिकों पर भी हमले करने के आरोप लगे हैं।
यह संघर्ष सीरिया में वर्षों लंबे गृहयुद्ध के बाद बनी नई सरकार के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। दिसंबर में बशर अल-असद के शासन का अंत हुआ था और अब नई, मुख्यतः सुन्नी मुस्लिम सरकार सत्ता में है। लेकिन अल्पसंख्यकों, विशेषकर अलवी समुदाय, में सरकार के प्रति अविश्वास है। मार्च में हुए झड़पों में सैकड़ों अलवी नागरिक मारे गए थे।
ब्रिटेन स्थित सीरियन ऑब्ज़र्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार सोमवार से अब तक 300 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें चार बच्चे, आठ महिलाएं और 165 सैनिक शामिल हैं।
संघर्ष के चलते संचार सेवाएं बाधित हो गई हैं और कई लोग अपनों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। दमिश्क़ के उपनगर जरमाना की रहने वाली एवलिन अज़्ज़ाम ने बताया कि उनका पति रोबर्ट कीवान स्वैदा में फंस गए थे। फोन पर बातचीत के दौरान उन्होंने सुना कि सुरक्षा बलों ने पूछताछ के दौरान उन पर गोली चला दी।
संयुक्त अरब अमीरात में रहने वाली एक ड्रूज़ महिला ने बताया कि उनके स्वैदा स्थित घर के पास अस्पताल के इलाके में गोलाबारी हो रही थी और उनके माता-पिता व बहन तहख़ाने में छिपे हुए हैं। उन्होंने कहा, “मैंने उन्हें कभी इस तरह रोते हुए नहीं सुना।”
एक अन्य महिला ने बताया कि उनके रिश्तेदारों का घर जला दिया गया और सभी अंदर ही मारे गए। उन्होंने कहा, “यह वैसा ही है जैसा 2018 में इस्लामिक स्टेट ने स्वैदा पर हमला किया था। उस समय मेरे चाचा मारे गए थे।”
ड्रूज़ धर्म 10वीं शताब्दी में इस्माइली शिया शाखा से अलग होकर बना था। आज दुनिया भर में करीब 10 लाख ड्रूज़ हैं, जिनमें आधे से अधिक सीरिया में रहते हैं। बाक़ी लेबनान और इस्राइल में बसे हैं, जिनमें ग़ोलान हाइट्स क्षेत्र भी शामिल है जिसे इस्राइल ने 1967 के युद्ध में सीरिया से छीना था।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में देखा गया कि सरकारी समर्थक लड़ाके ड्रूज़ धर्मगुरुओं की मूंछें जबरन मुंडवा रहे हैं, उनके झंडों को रौंद रहे हैं और धार्मिक नेताओं की तस्वीरों का अपमान कर रहे हैं। जवाब में कुछ ड्रूज़ लड़ाके भी पकड़े गए सैनिकों के शवों के साथ खड़े होकर तस्वीरें खिंचवाते दिखे।
मानवाधिकार निगरानी संस्था ने बताया कि 27 लोगों की “मैदान में फांसी” दे दी गई।
सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरआ ने इन घटनाओं की निंदा की और कहा कि दोषियों को कड़ी सज़ा दी जाएगी। उन्होंने कहा, “ऐसे अपराध किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं। ये सीरियाई राज्य के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध हैं।”
इस्राइली सीमा पर ग़ोलान हाइट्स में ड्रूज़ समुदाय के लोगों ने अपने सीरियाई भाइयों के पक्ष में प्रदर्शन किया।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका इसराइल-सीरिया संघर्ष को लेकर “गंभीर रूप से चिंतित” है और यह एक “गलतफहमी” का नतीजा हो सकता है। उन्होंने बताया कि अमेरिका दोनों पक्षों से संपर्क में है और स्थिति को शांत करने की कोशिश कर रहा है।













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