नई दिल्ली। चीन पर लगाम लगाने के लिए भारत ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत पूर्वी लद्दाख में 255 किमी की सड़क को अपग्रेड किया जा रहा है। यह सड़क है डारबक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड। 16 हजार 600 फीट की ऊंचाई पर बनी यह सड़क लेह से डीबीओ को जोड़ती है। सड़क के अपग्रेड होने के बाद इस पर भारी वाहन भी आसानी से चल सकेंगे। इसके अलावा टैंकों और लंबी दूरी की मिसाइल ढोने में सक्षम विशेष ट्रक भी इस सड़क पर दौड़ेंगे। ऐसा करके भारत इस क्षेत्र में चीन के तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ का जवाब देना चाहता है।
क्या है क्लास 70 सड़क
यह पूरा रूट कराकोरम पहाड़ी रेंज में है। जानकारी के मुताबिक इसे ‘क्लास 70’ की खासियतों से लैस किया जाएगा। द ट्रिब्यून के मुताबिक अपग्रेड होने के बाद इस सड़क और इस पर स्थित सभी पुलों से 70 टन भार वाले वाहन बड़ी आसानी से गुजर जाएंगे। चाहे आर्मी टैंक करियर्स हों या फिर मिसाइल ढोने वाले ट्रक, उन्हें भी कोई परेशानी नहीं होगी। डीएस-डीबीओ सड़क गलवान घाटी जाने का एकमात्र रास्ता है। बता दें कि गलवान में ही जून 2020 में भारत और चीन के बीच भिड़ंत हुई थी। डीबीओ का उत्तरी हिस्सा कराकोरम दर्रे में पड़ता है, जो लद्दाख को चीन के जिनजियांग क्षेत्र से अलग करता है। वहीं, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देपसांग का मैदान डीबीओ के पूरब में पड़ता है। यहीं पर मई 2020 से अक्टूबर 2024 तक भारत-चीन के बीच टकराव रहा। उत्तरी इलाका श्योक को आर्मी सब सेक्टर नॉर्थ कहती है।
भविष्य पर भारत की नजर
भारतीय सेना इस बात को ध्यान में रखकर चल रही है कि चीनी सेना पश्चिम की ओर 16,000 फुट ऊंचे डेपसांग मैदानों में आगे बढ़ सकती है। इस तरह पीएल डीएस-डीबीओ सड़क के एक हिस्से को खतरा पहुंचा सकती है। ऐसे में वह डीबीओ और आगे कराकोरम पास तक की पहुंच बाधित कर सकता है। भारतीय सेना को इस तरह से तैनात किया गया है कि वह एसएसएन में चीन की सेना के इस तरह के हमले रोक सके।
अपनी जगह तैनात हैं सेनाएं
मई 2020 से दोनों तरफ की सेनाएं एलएसी पर अपनी-अपनी जगह पर तैनात हैं। एसएसएन पर पकड़ बनाए रखना बेहद जरूरी माना जा रहा है। ऐसे में डीएस-डीबीओ सड़क एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक लिंक बन जाती है। इसके अलावा एक ही रास्ते पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक रास्ता भी तैयार किया जा रहा है। यह लेह-सासेर ला-मुर्गो-डीबीओ एक्सिस होगा, जो अगले साल तक रेडी हो जाएगा। इसका अलाइनमेंट एलएसी के पास चीनी सेना की जमीन पर गश्त करने वाली टीमों के लिए दिखाई नहीं देता।













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