डेस्क:यूपी कांग्रेस अपनी जिला इकाइयों को बूथ स्तर तक मजबूती देने में जुटी है। जिला अध्यक्षों के लिए पंचायत चुनाव पहली परीक्षा होगा। वजह है कि पंचायत चुनावों में इन्हें ही ग्राम प्रधानों और ब्लॉक सदस्यों तक के चुनावों में प्रत्याशी चुनने की सीधी भूमिका दी जाएगी। चूंकि, 2027 के विधानसभा चुनावों में भी उम्मीदवार चुनने में इनकी भूमिका होगी तो पंचायत चुनाव के आधार पर ही उनकी राजनीतिक और स्थानीय समीकरणों की समझ को परखा जाएगा।
संगठन सृजन अभियान के तहत कांग्रेस जिला इकाइयों को बूथ स्तर तक तैयार करने में जुटी है। इसके लिए 15 अगस्त तक का समय रखा गया है। जानकारों के मुताबिक, 15 अगस्त के बाद कांग्रेस उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर राजनीतिक आंदोलन शुरू करेगी ताकि जिला इकाइयों को सक्रिय किया जाए। इस दौरान कांग्रेस प्रदेश स्तर पर लगातार उनकी गतिविधियों की निगरानी कर के कमजोर कड़ियों को बाहर करने पर भी विचार करेगी। यह प्रक्रिया पंचायत चुनाव तक चलेगी। कांग्रेस अपने जिला अध्यक्षों को उनकी समझ और फैसलों के आधार पर पहली बार पंचायत चुनावों में परखेगी। परिणाम के आधार पर ही भविष्य के चुनावों में उनकी सलाह के महत्व को वजन दिया जाएगा।
कांग्रेस के अहमदाबाद अधिवेशन में जिला अध्यक्षों की भूमिका महत्वपूर्ण किए जाने का फैसला लिया गया था। यही वजह है कि यूपी कांग्रेस पहली बार जिला-शहर इकाइयों के संगठन में इतनी गंभीरता बरत रही है। जिला इकाइयों के आने वाले नामों की सूची को प्रदेश स्तर पर परखा जा रहा है। नीचे से फीडबैक लेकर एक-एक पदाधिकारियों के नामों को मंजूरी दी जा रही है। कांग्रेस का प्रदेश स्तरीय कंट्रोल रूम लगातार कार्यक्रमों में जिला इकाइयों की सक्रियता और बूथ स्तर तक संगठन तैयार करने की मॉनीटरिंग कर रहा है। कांग्रेस ने पहली बार जिलों में पांच परतों में संगठन तैयार करने की नीति अपनाई है। मंडल इकाइयों के गठन की प्रक्रिया फिलहाल चल रही है और इसके बाद बूथ स्तर का संगठन तैयार किया जाएगा।
कांग्रेस अपने संगठन को न केवल बड़ा और मजबूत बनाना चाहती है बल्कि उसे जमीन पर दिखाना भी चाहती है। यही वजह है कि सभी जिला इकाइयों को आदेश दिए गए हैं कि वे कोई भी राजनीतिक कार्यक्रम लगातार एक ही जगह पर न करें। पूरे जिले में हर बार अलग-अलग ब्लॉक के अलग-अलग स्थान चुनें ताकि सभी लोगों तक अपना संदेश पहुंचाया जा सके। वहीं, पदाधिकारियों व पूर्व पदाधिकारियों को निर्देश हैं कि वे अपने घरों पर नाम तिरंगा पट्टी में लिखें और अपने घरों पर पार्टी का झंडा जरूर लगाएं ताकि उन्हें लोग जान सकें कि वे कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ता हैं। इस योजना को समर्थकों तक विस्तार दिया जाना है।













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