डेस्क: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी से बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने यूक्रेन युद्ध से जुड़े ताज़ा हालात और इसे लेकर हुए अमेरिका-रूस शिखर सम्मेलन पर चर्चा की।
जयशंकर ने इस वार्ता की जानकारी एक्स (पूर्व ट्विटर) पर साझा की। उन्होंने लिखा— “हमारी चर्चाओं में हाल के यूक्रेन घटनाक्रम और अन्य मुद्दे शामिल रहे।”
गौरतलब है कि शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सात साल बाद आमने-सामने मिले। अलास्का में हुई इस बैठक का मकसद यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के रास्ते तलाशना था।
भारत सरकार ने इस शिखर सम्मेलन का स्वागत करते हुए इसे शांति स्थापित करने की दिशा में “सराहनीय कदम” बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि आगे का रास्ता केवल संवाद और कूटनीति से ही निकल सकता है। मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया—
“भारत अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई शिखर वार्ता का स्वागत करता है। शांति की दिशा में दोनों नेताओं का नेतृत्व अत्यंत प्रशंसनीय है। भारत सम्मेलन में हुई प्रगति की सराहना करता है। आगे का रास्ता केवल संवाद और कूटनीति से ही संभव है। दुनिया यूक्रेन संघर्ष के शीघ्र अंत की प्रतीक्षा कर रही है।”
भारत के लिए यह शिखर सम्मेलन इसलिए भी अहम रहा क्योंकि अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने को लेकर भारतीय आयात पर भारी टैरिफ लगा दिए हैं।
वर्तमान में भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में 50% से अधिक शुल्क वसूला जा रहा है, जिसमें 25% अतिरिक्त द्वितीयक शुल्क भी शामिल है। राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर आरोप लगाया है कि वह रूसी युद्ध मशीन को आर्थिक रूप से मज़बूत कर रहा है।












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