नई दिल्ली:केंद्र सरकार आज से शुरू हो रही जीएसटी काउंसिल की दो दिवसीय बैठक में रोज़मर्रा की उपयोगी वस्तुओं पर टैक्स घटाने और लग्ज़री व अवगुणों से जुड़ी वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाने जैसे महत्वाकांक्षी सुधारों पर चर्चा करने जा रही है। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी और इसमें सभी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
क्या है नया प्रस्ताव?
सरकार ने मौजूदा चार कर स्लैब (5%, 12%, 18% और 28%) को सरल बनाकर केवल दो दरें रखने का सुझाव दिया है—
- 5% और 18%,
जबकि कुछ वस्तुओं पर 40% की विशेष दर लागू होगी।
इससे आम आदमी की जेब पर बोझ घटने की उम्मीद है, लेकिन विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्य राजस्व घाटे की भरपाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
पीएम मोदी का ऐलान और जीओएम की सहमति
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से जीएसटी सुधारों का संकेत दिया था। इसके बाद केंद्र ने राज्यों के मंत्रियों के समूह (जीओएम) को प्रारंभिक प्रस्ताव भेजा। जीओएम ने कर दरों में कमी पर सहमति जताई है। काउंसिल आज और कल (3-4 सितंबर) इन सिफारिशों पर अंतिम विचार करेगी।
क्या होगा सस्ता?
- घी, मेवे, 20 लीटर पैक्ड पानी, नमकीन
- कुछ दवाइयाँ और चिकित्सा उपकरण
- जूते, परिधान, पेंसिल, साइकिल, छाते और हेयर पिन
- कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान (टीवी, वॉशिंग मशीन, फ्रिज)
इन वस्तुओं पर टैक्स घटकर 12% से 5% या 28% से 18% हो सकता है।
कहाँ बढ़ेगा टैक्स?
- इलेक्ट्रिक वाहन: 40 लाख रुपये तक के ईवी पर 18% टैक्स का प्रस्ताव, जबकि केंद्र 5% दर बनाए रखने के पक्ष में है।
- कारें: शुरुआती कारों पर 18%, लेकिन एसयूवी और लग्ज़री कारों पर 40% विशेष दर।
- तंबाकू, पान मसाला और सिगरेट: 40% विशेष टैक्स के साथ अतिरिक्त उपकर लगाने पर भी विचार।
राज्यों की चिंता
पश्चिम बंगाल सहित विपक्षी दलों के शासन वाले राज्यों (केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, झारखंड) ने मांग की है कि 40% से अधिक लगाए जाने वाले किसी भी उपकर से होने वाली आय राज्यों के साथ साझा की जाए।













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