डेस्क:देश के दो पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी, ओम प्रकाश रावत और पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने वोट चोरी के आरोपों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी से हलफनामा मांगने को गलत माना है। रिटायर्ड अफसरों ने कहा कि सवाल उठाने वाले से सवाल करना चुनाव आयोग का काम नहीं है बल्कि आयोग को जांच कर लोगों के सामने तथ्य रखना चाहिए था। एक पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग का काम गुस्सा करना नहीं है और अगर वो होते तो फौरन जांच का आदेश दे देते।
अंग्रेजी समाचार चैनल इंडिया टुडे के दक्षिण भारत कॉन्क्लेव में एक सत्र के दौरान कुरैशी, रावत और लवासा एक साथ वोट चोरी के आरोप, बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और परिसीमन के बाद राज्यों के बीच सीट बंटवारे जैसे मसलों पर बात कर रहे थे। इसी क्रम में राहुल से हलफनामा मांगते ज्ञानेश कुमार का वीडियो चलाया गया, जिसमें वो कह रहे हैं- “हलफनामा देना होगा या देश से माफी मांगनी होगी। तीसरा विकल्प नहीं है। अगर सात दिन में हलफनामा नहीं मिला तो इसका अर्थ कि सारे आरोप निराधार हैं।”
पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने इस पर कहा- “अगर कोई गंभीर आरोप है, जिसकी चुनाव आयोग को जांच करनी चाहिए, तो उसके लिए किसी को हलफनामा देने की जरूरत नहीं है। … चुनाव आयोग वोटर लिस्ट का कस्टोडियन है। अगर ऐसे गंभीर आरोप लगते हैं तो चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को छोड़िए, किसी सार्वजनिक संगठन की भी जिम्मेदारी है कि वो जांच करे। आयोग की निगरानी में तैयार वोटर लिस्ट की सच्चाई पर शंका जताई गई है तो जरूरत है कि वो इसकी जांच करे और लोगों को फैक्ट्स बताए।”
लवासा ने आगे कहा- “समझने वाली बात यह है कि चुनाव आयोग ही सक्षम है जो इस मसले पर लोगों को तथ्य बता सकता है। आयोग के आदेश, निर्देश और निगरानी में फील्ड मशीनरी काम करती है। लाखों लोग काम करते हैं। किसी से गलती हो सकती है। मुझे नहीं लगता कि आयोग को आरोप को अपने खिलाफ समझना चाहिए। कोई शिकायत है तो उसे जांचना चाहिए।”
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने हलफनामा मांगने पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि सवाल पूछने वाले से सवाल पूछना चुनाव आयोग का काम नहीं है। ओपी रावत ने कहा- “असल में हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) से सवाल करना कभी भी चुनाव आयोग का काम नहीं रहा है। एक आम वोटर भी जब सवाल उठाता है तो चुनाव आयोग उसे गंभीरता से लेता है, तुरंत उसकी जांच करता है और फौरन जांच के नतीजे उस वोटर और आम लोगों को बताता है ताकि आशंका की बात बची ना रहे। चुनाव आयोग को इसका समाधान यथाशीघ्र करना चाहिए था।”
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा कि गुस्सा करना चुनाव आयोग का स्वभाव नहीं है। कुरैशी ने कहा- “भूलना नहीं चाहिए कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं। वो सिर्फ अपना विचार नहीं रख रहे हैं, वो लाखों लोगों की आवाज उठा रहे हैं। इसलिए उन्होंने जो कहा उस पर आयोग का गुस्सा होना, गुस्सा करना चुनाव आयोग का स्वभाव नहीं है। हम जांच का आदेश देते, आरोप को गंभीरता से लेते।”
एसवाई कुरैशी ने राहुल गांधी से वोट चोरी के आरोपों पर हलफनामा मांगने पर कहा- “अगर वो पलटकर एफिडेविट मांग लें कि आप हलफनामा दो कि आपने जो 65 लाख नाम डिलीट किए हैं, उसमें एक भी गलती मिली तो आप आपराधिक मुकदमा के भागी होंगे। गलती किसी तरफ से भी हो सकती है। मुझे नहीं लगता कि लेकिन विपक्ष के नेता को इस तरह, इस लहजे और इस गुस्से में चुनौती देने से चुनाव आयोग को कोई वाहवाही मिली है।”













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