डेस्क:राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को धर्मांतरण विरोधी बिल (राजस्थान विधिविरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025) को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। बिल पारित होने के साथ ही विधानसभा की कार्यवाही 10 सितंबर तक स्थगित कर दी गई। इस दौरान सदन के भीतर कांग्रेस ने तीखा विरोध जताया और जमकर नारेबाजी की।
विधेयक में जबरन धर्म परिवर्तन, शादी के बहाने धर्म बदलवाने या सामूहिक धर्मांतरण जैसे मामलों पर कठोर प्रावधान शामिल किए गए हैं। जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर न्यूनतम 7 साल और अधिकतम 14 साल की सजा तथा 5 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। वहीं यदि नाबालिग, महिला, दिव्यांग या अनुसूचित जाति-जनजाति के व्यक्ति का धर्म परिवर्तन कराया जाता है तो दोषी को कम से कम 10 साल और अधिकतम 20 साल की कैद के साथ 10 लाख रुपए तक जुर्माना देना होगा।
सरकार का कहना है कि इस कानून से धर्मांतरण के मामलों पर रोक लगेगी और सामाजिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
बिल के प्रावधानों के मुताबिक अगर किसी संस्था या भवन में धर्मांतरण होता है, तो प्रशासन उस संपत्ति को जब्त कर सकेगा। अवैध निर्माण या अतिक्रमण पर खड़े भवनों को सीज करने और बुलडोजर चलाने का भी प्रावधान किया गया है।
अगर किसी जगह पर सामूहिक धर्मांतरण कराया जाता है तो उस भवन को जब्त किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई जांच के बाद ही होगी।
विधेयक में साफ किया गया है कि यदि धर्म परिवर्तन केवल शादी के उद्देश्य से कराया गया है तो ऐसी शादी को कोर्ट द्वारा शून्य घोषित किया जाएगा। इस प्रावधान को सीधे तौर पर “लव जिहाद” से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, “घर वापसी” यानी अपने पैतृक धर्म में लौटने को धर्मांतरण की परिभाषा से बाहर रखा गया है।
बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस ने भाग नहीं लिया और अतिरिक्त कैमरे लगाए जाने के मुद्दे पर हंगामा शुरू कर दिया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और वरिष्ठ विधायक राजेंद्र पारीक ने इसे निजता का उल्लंघन बताया। इस पर सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने जवाब देते हुए कहा कि सदन कोई निजी स्थान नहीं है, यहां सब खुले में बैठते हैं।
भाजपा विधायक गोपाल शर्मा ने कांग्रेस पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष कैमरों का विरोध इसलिए कर रहा है ताकि उनकी गतिविधियां छुप सकें। शर्मा ने कहा, “ये लोग सदन में धरना देते हैं, पैर दबवाते हैं और रात में अनुचित कृत्य करने की कोशिश करते हैं।”
हंगामे के कारण कार्यवाही तीन बार स्थगित करनी पड़ी। स्पीकर वासुदेव देवनानी ने कई बार बीच में बोलने वाले विधायकों को फटकार लगाई और कहा कि इस तरह का तमाशा नहीं चलेगा।
कांग्रेस ने विधानसभा परिसर के बाहर भी प्रदर्शन किया। पंचायत राज और स्थानीय निकाय चुनाव करवाने में देरी का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस विधायक पैदल मार्च करते हुए विधानसभा पहुंचे।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि सरकार हार के डर से पंचायत और निकाय चुनाव टाल रही है। उन्होंने कहा कि संविधान में पांच साल के भीतर चुनाव करवाने का प्रावधान है, लेकिन सरकार बार-बार बहाने बना रही है।
धर्मांतरण विरोधी बिल पास होने के बाद राजस्थान की राजनीति और गरमा गई है। भाजपा इसे “धर्म की रक्षा और समाज में संतुलन बनाए रखने” वाला कानून बता रही है। दूसरी ओर कांग्रेस इसे लोगों की स्वतंत्रता पर अंकुश और धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति करार दे रही है।













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