डेस्क: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर हालात अब सकारात्मक दिशा में बढ़ते दिख रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत स्तर पर वार्ता को आगे बढ़ाने की पहल की है और अपने-अपने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बातचीत को जल्द से जल्द नतीजे तक पहुंचाया जाए।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, “भारत और अमेरिका के बीच व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए बातचीत जारी है। मैं अपने बहुत अच्छे मित्र प्रधानमंत्री मोदी से आने वाले हफ्तों में बातचीत करने का इंतजार कर रहा हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि दोनों महान देशों के लिए यह वार्ता सफल निष्कर्ष तक पहुंचेगी।”
इसी भाव को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भी भारत-अमेरिका संबंधों को “प्राकृतिक साझेदारी” करार देते हुए कहा, “भारत और अमेरिका घनिष्ठ मित्र हैं। हमारी व्यापारिक वार्ताएं दोनों देशों की असीम संभावनाओं को अनलॉक करने का मार्ग प्रशस्त करेंगी। हमारी टीमें जल्द से जल्द इन चर्चाओं को अंतिम रूप देने के लिए काम कर रही हैं। मैं भी राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत का इंतजार कर रहा हूं।”
यह बयानबाजी ऐसे समय आई है जब हाल ही में ट्रंप ने भारत के खिलाफ कड़े टैरिफ लगाए थे और व्यापार वार्ता अस्थायी ठहराव में चली गई थी। कृषि और डेयरी क्षेत्र को लेकर अमेरिका की मांगों को भारत ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, वहीं अमेरिका ने रूस से तेल खरीद और अन्य भारतीय वस्तुओं पर 25 से 50 फीसदी तक टैरिफ लगाने का फैसला किया था। इसी कारण अगस्त के अंतिम सप्ताह में होने वाला वार्ता का छठा दौर टल गया था।
हालांकि अब दोनों नेताओं के बीच सीधी बातचीत और आपसी विश्वास से संकेत मिल रहे हैं कि गतिरोध टूट सकता है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल 17-18 सितंबर को भारत दौरे पर आएगा और इसी दौरान 6 P8I पनडुब्बी रोधी विमान से जुड़ी भारतीय चिंताओं पर भी चर्चा होगी। इसके साथ ही 113 GE-404 विमान इंजन के खरीद समझौते पर हस्ताक्षर की भी संभावना है, जो तेजस मार्क-1A लड़ाकू विमानों को शक्ति देंगे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप के हालिया रुख में नरमी और मोदी के स्पष्ट संदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों देशों की नेतृत्व-स्तरीय मित्रता ही द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की असली कुंजी है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-अमेरिका वस्तु व्यापार 131.8 अरब डॉलर का रहा, जिसमें भारत का निर्यात 86.5 अरब डॉलर और आयात 45.3 अरब डॉलर रहा। यह आंकड़े दिखाते हैं कि साझेदारी को नया आयाम देने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
भारत के लिए यह सिर्फ व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोग को और गहराई देने का अवसर है। दोनों देशों के बीच सकारात्मक संवाद से स्पष्ट है कि दुनिया की सबसे बड़ी लोकतंत्रों की जोड़ी आने वाले समय में वैश्विक संतुलन पर भी असर डालेगी।













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