डेस्क:उदयपुर की ठंडी रात में सियासी पारा अचानक चढ़ा जब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक के बाद एक वार कर दिए। मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने न सिर्फ भाजपा सरकार पर निशाना साधा, बल्कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और वसुंधरा राजे को लेकर भी बड़े बयान दे डाले।
गहलोत ने कहा वसुंधरा राजे जब मुख्यमंत्री थीं, तब थोड़ा अलग चल रही थीं, लेकिन बाद में संबंध ठीक हो गए। पता नहीं उन्हें क्यों घर बैठा दिया गया। वो सक्षम नेता हैं, दो बार सरकार चला चुकी हैं। अब डर है कि कहीं भजनलाल शर्मा की भी स्थिति मुख्य सचिव सुधांश पंत जैसी न हो जाए।
दरअसल, हाल ही में मुख्य सचिव सुधांश पंत का दिल्ली तबादला कर दिया गया, जिस पर गहलोत ने तंज कसते हुए कहा – “इतनी अचानक दिल्ली भेज दिया गया, जैसे कोई बात छिपाई जा रही हो। मुख्यमंत्री की स्थिति भी कहीं ऐसी न हो जाए कि आदेश ऊपर से आए और कुछ कर ही न सकें।”
गहलोत ने सीएम भजनलाल शर्मा पर तंज कसते हुए कहा – “इनको पहली बार मौका मिला है, पहली बार मुख्यमंत्री बने हैं, पहली बार MLA हैं। भगवान ने मौका दिया है, लेकिन लगता है कि वो समझ नहीं पा रहे कि करना क्या है।”
उन्होंने आगे कहा कि राज्य में चल रहे “शहरी सेवा शिविर” की कोई मॉनिटरिंग नहीं हो रही। “पता नहीं ये शिविर चल भी रहे हैं या सिर्फ दिखावे के लिए हैं। विपक्ष का काम है कमियां बताना, आलोचना करना — लेकिन सरकार को इसे दुश्मनी की तरह नहीं लेना चाहिए।”
गहलोत ने वंदे मातरम् के कार्यक्रमों को लेकर भी बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कहा – “बीजेपी का वंदे मातरम् से क्या लेना-देना? आरएसएस की किसी शाखा में आज तक वंदे मातरम् नहीं गाया गया। इसे पहली बार कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था। कांग्रेस का दिया हुआ गीत है, इसे राजनीतिक मत बनाओ।”
उन्होंने कहा – “हमारे ज़माने में बड़े कार्यक्रमों से पहले समाजसेवियों, साहित्यकारों, राजनीतिक दलों से चर्चा होती थी। अब तो बस इवेंट हो रहे हैं — सरकार का पैसा उड़ रहा है, लेकिन प्रचार बीजेपी का हो रहा है। बाकी तो रामजी राजी हैं।”
गहलोत ने कहा कि मौजूदा सरकार विपक्ष की बातों को नजरअंदाज कर रही है। “शासन चलाने के लिए विपक्ष को भी साथ लेना चाहिए। लोकतंत्र में बिना विपक्ष के शासन तानाशाही जैसा हो जाता है।”
उन्होंने कहा – “प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी की जिम्मेदारी अलग है, लेकिन राज्य सरकार को विपक्ष की भूमिका का सम्मान करना चाहिए।”
गहलोत ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा – “जब भैरोंसिंह शेखावत सीएम थे, तब भी हमारे संबंध अच्छे थे। उन्होंने कहा था कि मेरे जीते जी कांग्रेस की सरकार नहीं आने दूंगा, लेकिन जब कांग्रेस की सरकार आई, तब भी हमने एक-दूसरे का सम्मान किया। आज का माहौल वैसा नहीं है, आज विपक्ष को कुछ समझा ही नहीं जाता।”
उदयपुर के सविना खेड़ा में हाल ही में हुई अवैध कॉलोनी तोड़फोड़ पर गहलोत ने सरकार को घेरा। बोले – “जब प्लॉट काटे जा रहे थे, तब प्रशासन सोया हुआ था। अब गरीबों के घर गिरा रहे हैं। बिना नोटिस बुलडोजर चला दिया गया, लाखों का नुकसान हो गया।”
उन्होंने कहा – “कानून के हिसाब से कार्रवाई होनी चाहिए। पहले नोटिस दो, जवाब लो, फिर फैसला करो। आज तुम बुलडोजर चलाने पर खुश हो, कल तुम्हारे घर आएगा तो क्या करोगे?”













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