डेस्क:शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने सोमवार को कहा कि वह बीएमसी चुनाव अकेले लड़ने के कांग्रेस के फैसले पर उसके आलाकमान से बात करेंगे। एक महीने से अधिक के ‘ब्रेक’ के बाद राउत ने संवाददाताओं से कहा कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की हार सुनिश्चित करने के लिए विपक्षी महा विकास आघाडी में राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) का होना जरूरी है। राउत का मानना है कि कांग्रेस के बीएमसी चुनाव अकेले लड़ने के फैसले से भाजपा को फायदा हो सकता है।
दरअसल, पिछले महीने कांग्रेस की मुंबई इकाई ने मनसे के साथ गठबंधन से इनकार कर दिया था और कहा था कि वह स्वतंत्र रूप से नगर निकाय चुनाव लड़ेगी। हालांकि, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना इस बात पर जोर दे रही है कि कांग्रेस को मुंबई में महा विकास आघाडी (MVA) का हिस्सा होना चाहिए। राउत ने कहा कि कांग्रेस से चर्चा चल रही है, लेकिन अगर बिहार चुनाव के बाद कांग्रेस का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे मुंबई में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ना चाहते हैं तो उन्हें ऐसा करने दीजिए। पिछले महीने हुए बिहार विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 243 सदस्यीय सदन में 200 से अधिक सीट जीतकर सत्ता बरकरार रखी। विपक्षी महागठबंधन खेमे का हिस्सा कांग्रेस केवल 6 सीट जीतने में सफल रही।
शिवसेना (UBT) के सांसद ने कहा कि मैं दिसंबर के दूसरे सप्ताह में दिल्ली जा रहा हूं और कांग्रेस आलाकमान से बात करने का प्रयास करूंगा। हमारा रुख यह है कि कांग्रेस को मुंबई में महा विकास आघाडी का हिस्सा बनना चाहिए। राज ठाकरे के (एमवीए खेमे में) आने से भाजपा की हार होगी। राउत ने कहा कि शिवसेना और मनसे के बीच सकारात्मक चर्चा हो रही है और सीट के बंटवारे पर बैठकें चल रही हैं। उन्होंने शिवसेना और मनसे के बीच संभावित गठबंधन को लेकर कहा कि उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे के बीच बेहतरीन संवाद है।
इस दौरान राज्यसभा सदस्य ने भाजपा पर पिछले पांच वर्षों में महाराष्ट्र में चुनावी संस्कृति को भ्रष्ट करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि नगरपालिका परिषद और नगर पंचायत चुनावों के लिए इतनी बड़ी मात्रा में धन का इस्तेमाल कभी नहीं किया गया।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में विभिन्न स्थानीय निकायों के लिए चुनाव मंगलवार को होने हैं। बीएमसी और कुछ अन्य नागरिक निकायों के चुनावों का कार्यक्रम अभी तक घोषित नहीं किया गया है। उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया है कि महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव 31 जनवरी, 2026 तक पूरे कर लिये जाएं।













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