कंटालिया, पाली: जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य अनुशास्ता महामना आचार्यश्री भिक्षु की जन्मस्थली कंटालिया में आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष ‘भिक्षु चेतना वर्ष’ के महाचरण के आयोजन का सातवां दिवस। युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में भव्य आयोजन। अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ।
साध्वी शरदयशाजी ने गीत का संगान किया। आज के निर्धारित विषय ‘आचार्यश्री भिक्षु की शिष्य परंपरा’ पर मुनि सिद्धकुमारजी ने अपनी विचाराभिव्यक्ति दी। महामना आचार्यश्री भिक्षु के परंपर पट्टधर, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने चतुर्विध धर्मसंघ को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि धर्म एक ऐसा कल्पवृक्ष है, जिसके माध्यम से क्या-क्या नहीं प्राप्त हो सकता है। राज्य की प्राप्ति, सुयोग्य पुत्र की प्राप्ति, रूप की प्राप्ति, विशेष ज्ञान, चातुर्य, गुणों का विकास, अच्छा विचार होना भी प्राप्त हो सकता है। अच्छे शिष्यों का प्राप्त होना भी भाग्य व धर्म का योग होता है। धर्म की प्रभावना होती है तो योग्य शिष्यों की प्राप्ति हो सकती है।
भिक्षु स्वामी शिष्य परंपरा भी बहुत अच्छी मिली थी। एक-दूसरों को सम्मान देना होता तो सम्मान भी प्राप्त होता है। आचार्यश्री भिक्षु स्वामी ने अपने सहवर्ती संतों को विशेष मान दिया तो उन संतों ने आचार्यश्री का बहुत मान किया। आज कितनी बड़ी शिष्य संपदा हो गई है। आचार्यश्री की शिष्य संपदा अच्छी होती है तो आचार्य को भी थोड़ी निश्चिंतता रह सकती है। आचार्यश्री भिक्षु स्वामी की शिष्य संपदा भी बहुत ही योग्य थी। साधु-साध्वियों में ऐसा समर्पण हो कि बिना पूछे आचार्य को जहां भी भेजना हो, वहां उनको भेज देना और शिष्य में इतना समर्पण हो कि आचार्यश्री की किसी भी आज्ञा का पालन करने के विचार नहीं करना बहुत अच्छी बात हो सकती है। धर्मसंघ के सभी साधु-साध्वियों में योग्यता का विकास होता रहे, यह काम्य है।
विश्व ध्यान दिवस के संदर्भ में आचार्यश्री की अनुज्ञा से साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने चतुर्विध धर्मसंघ को कुछ समय तक ध्यान का प्रयोग कराया। साध्वी कीर्तिलताजी ने अपने सहवर्ती साध्वियों के साथ संवादात्मक प्रस्तुति देते हुए गीत का भी संगान किया। आचार्यश्री साध्वीवृंद को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। ईक्षु और जियाना ने अपनी बालसुलभ प्रस्तुति दी। श्री संजय मरलेचा, श्री महेन्द्र मरलेचा ने अपनी अभिव्यक्ति दी। श्री पवन अग्रवाल ने ‘भिक्षु आराधना’ पुस्तिका का लोकार्पण आचार्यश्री के समक्ष किया। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। सहाडा विधायक श्री लादूलाल पितलिया ने भी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करते हुए आचार्यश्री से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने गंगापुरवासियों के साथ चतुर्मास की प्रार्थना भी की। पूर्व न्यायाधीश श्री गौतम चोरड़िया ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी।













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