डेस्क: उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव के संकेत सामने आए हैं। चुनाव आयोग के अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, राज्य के लगभग 18.70 प्रतिशत मतदाता, यानी करीब 2.89 करोड़ नाम, वोटर लिस्ट से हटाए जा सकते हैं। इसी बीच आयोग ने ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख 31 दिसंबर से बढ़ाकर 6 जनवरी 2026 कर दी है। उल्लेखनीय है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्यक्रम अब तक तीन बार बदला जा चुका है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिनवा ने बताया कि प्रदेश में 15,030 नए मतदान केंद्र बनाए गए हैं। बूथों के युक्तिकरण के चलते मतदाताओं के नाम नए केंद्रों पर स्थानांतरित करने और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत पड़ी, जिसके कारण कार्यक्रम में संशोधन किया गया।
नए कार्यक्रम के अनुसार, 6 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद 6 जनवरी से 6 फरवरी तक दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 6 मार्च 2026 को होगा।
इतने बड़े पैमाने पर नाम क्यों कट रहे हैं?
प्रदेश में कुल 15.44 करोड़ मतदाताओं में से करीब 2.89 करोड़ नाम हटाने के लिए चिह्नित किए गए हैं। इनमें
- 46.24 लाख मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है,
- 1.30 करोड़ लोग स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके हैं,
- 79.52 लाख मतदाता सर्वे के दौरान उपलब्ध नहीं पाए गए,
- जबकि 25.47 लाख मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए हैं।
शहरी जिलों में सबसे अधिक कटौती
आंकड़ों से स्पष्ट है कि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी जिलों में नाम कटने की दर अधिक है।
- लखनऊ में करीब 12 लाख नाम हटाए जा सकते हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 30 प्रतिशत है।
- गाजियाबाद में 8.18 लाख नाम (28.83%) सूची से बाहर हो सकते हैं।
- कानपुर शहरी क्षेत्र में लगभग 9 लाख,
- जबकि प्रयागराज में 11.56 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने की संभावना है।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने के बावजूद विपक्षी दलों ने अब तक किसी बड़े पैमाने की अनियमितता का आरोप नहीं लगाया है। समाजवादी पार्टी के लखनऊ महानगर अध्यक्ष फकीर सिद्दीकी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि शहरी क्षेत्रों में पढ़ाई और नौकरी के कारण लोगों के नाम अक्सर दो जगह दर्ज हो जाते हैं। अब मतदाता एक ही स्थान पर नाम रखना चाह रहे हैं। हालांकि, पार्टी ने अपने बूथ एजेंटों को ‘लापता’ मतदाताओं की पहचान करने का निर्देश दिया है।
वहीं, भाजपा का फोकस उन नए मतदाताओं पर है, जो 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले 18 वर्ष की आयु पूरी करेंगे। पार्टी का अनुमान है कि करीब 50 लाख नए मतदाता सूची में जुड़ सकते हैं।
गौरतलब है कि यह पूरा पुनरीक्षण अभियान 1 जनवरी 2026 को पात्रता तिथि मानकर किया जा रहा है, ताकि आगामी चुनावों के लिए स्वच्छ, अद्यतन और त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार की जा सके।













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