डेस्क : बीजिंग ने दावा किया है कि उसने इस वर्ष की शुरुआत में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संक्षिप्त लेकिन तीव्र सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। हालांकि, भारत पहले ही किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावों को सिरे से खारिज करता रहा है।
मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय स्थिति और चीन की विदेश नीति पर आयोजित संगोष्ठी में बोलते हुए चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि चीन ने भारत-पाकिस्तान गतिरोध सहित कई वैश्विक विवादों में मध्यस्थता की है। चीनी विदेश मंत्रालय ने उनके बयान को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया।
वांग यी ने कहा, “स्थायी शांति के लिए हमने वस्तुनिष्ठ और न्यायसंगत रुख अपनाया और केवल लक्षणों ही नहीं, बल्कि मूल कारणों पर भी ध्यान केंद्रित किया। इसी चीनी दृष्टिकोण के तहत हमने उत्तरी म्यांमार, ईरानी परमाणु मुद्दे, पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव, फिलिस्तीन-इज़राइल विवाद और हालिया कंबोडिया-थाईलैंड संघर्ष में मध्यस्थता की।”
वांग के ये बयान उस सैन्य टकराव के कई महीने बाद आए हैं, जो मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था। यह टकराव 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ था, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। इसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया।
भारत ने लगातार यह स्पष्ट किया है कि इस चार दिन चले सैन्य टकराव का समाधान किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से नहीं, बल्कि सीधे सैन्य स्तर पर बातचीत के जरिए हुआ। नई दिल्ली के अनुसार, भारी नुकसान झेलने के बाद पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) ने भारतीय DGMO से संपर्क किया, जिसके बाद 10 मई से जमीन, हवा और समुद्र में सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाई और गोलीबारी रोकने पर सहमति बनी।
चीन के इस नए दावे ने संकट के दौरान उसकी भूमिका पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर इसलिए क्योंकि पाकिस्तान के साथ उसके गहरे रक्षा संबंध हैं। चीन, पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है।
इस बीच, नवंबर में अमेरिकी कांग्रेस को सलाह देने वाली संस्था यूएस-चीन इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन की एक रिपोर्ट में चीन पर ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुष्प्रचार अभियान चलाने का आरोप लगाया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग ने फर्जी सोशल मीडिया खातों के जरिए एआई-जनित तस्वीरें प्रसारित कीं, जिनमें कथित तौर पर विमान के मलबे दिखाए गए थे। आरोप है कि इसका उद्देश्य फ्रांस के राफेल लड़ाकू विमानों की बिक्री को नुकसान पहुंचाना और अपने जे-35 विमान को बढ़ावा देना था।
कूटनीतिक स्तर पर, ऑपरेशन सिंदूर के पहले ही दिन चीन ने संयम बरतने की अपील की थी, हालांकि उसने भारत की सैन्य कार्रवाई पर खेद भी जताया था। चीनी विदेश मंत्रालय ने 7 मई को कहा था, “चीन आज सुबह भारत द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण मानता है। हम मौजूदा स्थिति को लेकर चिंतित हैं।”













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