डेस्क :देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान बना चुके इंदौर में कथित तौर पर दूषित पेयजल ने गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा कर दिया है। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से उल्टी-दस्त फैलने के बाद अब तक 8 लोगों की मौत का दावा किया जा रहा है, जबकि प्रशासन ने फिलहाल 3 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है। इस घटना में 100 से अधिक लोग बीमार हुए हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
इस पूरे मामले पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने और सभी मरीजों के इलाज का खर्च राज्य सरकार द्वारा उठाए जाने की घोषणा की है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, भागीरथपुरा इलाके में पिछले एक सप्ताह के दौरान दूषित पानी पीने से बीमार पड़े 6 महिलाओं सहित 8 लोगों की जान चली गई। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, डायरिया से जिन तीन मौतों की पुष्टि हुई है, उनमें नंदलाल पाल (70), उर्मिला यादव (60) और तारा कोरी (65) शामिल हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने बताया कि प्रकोप की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र के 2,703 घरों का सर्वे किया और लगभग 12,000 लोगों की जांच की। इनमें से 1,146 लोगों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि अपेक्षाकृत गंभीर स्थिति वाले 111 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इनमें से 18 मरीज इलाज के बाद घर लौट चुके हैं। सीएमएचओ के अनुसार, मरीजों ने बताया कि दूषित पानी पीने के बाद उन्हें उल्टी-दस्त और शरीर में पानी की भारी कमी की समस्या शुरू हुई।
इस बीच, इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा है कि शुरुआती जांच में ड्रेनेज का पानी पेयजल लाइन में मिलने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम स्थिति पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। मेयर ने भरोसा दिलाया कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भागीरथपुरा के लोगों का आरोप है कि नगर निगम के नल कनेक्शन से लंबे समय से दूषित पानी आ रहा था, जिसकी कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। क्षेत्रीय पार्षद कमल बाघेला ने बताया कि 25 दिसंबर को सप्लाई किए गए पानी से असामान्य गंध आ रही थी और आशंका है कि उसी पानी के सेवन से लोग बीमार पड़े।
अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों का दर्द भी सामने आया है। नंदलाल पाल के बेटे सिद्धार्थ ने बताया कि उनके पिता को 28 दिसंबर को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां मंगलवार सुबह उनकी मौत हो गई। वहीं, क्षेत्र के निवासी जितेंद्र प्रजापत ने बताया कि उनकी बहन सीमा प्रजापत (50) की अचानक तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से नल का पानी पीने में कड़वा लग रहा था। लोगों को शक है कि या तो पानी में अत्यधिक मात्रा में जलशोधन रसायन मिला दिया गया या फिर ड्रेनेज का पानी पेयजल लाइन में मिल गया। उमा कोरी के पति बिहारी कोरी ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, ताकि किसी और परिवार को अपनों को खोने का दर्द न सहना पड़े।
गौरतलब है कि इंदौर अपनी पेयजल जरूरतों के लिए नर्मदा नदी पर निर्भर है। नर्मदा का पानी खरगोन जिले के जलूद से लगभग 80 किलोमीटर दूर से पाइपलाइन के जरिए शहर तक लाया जाता है और नगर निगम द्वारा घर-घर आपूर्ति की जाती है। अब इस पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।













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