डेस्क: भारतीय जनता पार्टी के वर्षों से जुड़े कई पुराने और ‘वफादार’ कार्यकर्ताओं ने टिकट न मिलने से नाराज़ होकर पार्टी के खिलाफ बगावत का रास्ता अपनाया है। इन नेताओं ने आगामी नागपुर महानगरपालिका (एनएमसी) चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ने का फैसला किया है। उनका आरोप है कि पार्टी ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले पुराने कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर बाहरी या दलबदल कर आए नेताओं को प्राथमिकता दी, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष फैल गया।
नागपुर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र है, ऐसे में यहां भाजपा के भीतर उठी यह नाराजगी राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।
गौरतलब है कि नागपुर समेत महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव 15 जनवरी को होने हैं। नागपुर नगर निगम में कुल 151 सीटें हैं। इनमें भाजपा 143 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि शिवसेना आठ सीटों पर मैदान में है। अजीत पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) 90 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस बिना किसी गठबंधन के सभी 151 सीटों पर उम्मीदवार उतार रही है, वहीं शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (शरदचंद्र पवार) 79 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
भाजपा के लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ता और पूर्व महापौर अर्चना देहांकर के पति विनायक देहांकर को वार्ड 17 से टिकट नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का ऐलान किया। हालांकि, उनकी पत्नी अर्चना देहांकर ने इस फैसले से दूरी बनाते हुए कहा कि वह केवल भाजपा उम्मीदवारों के लिए ही प्रचार करेंगी और अपने पति के चुनाव अभियान का समर्थन नहीं करेंगी।
एक टीवी चैनल से बातचीत में विनायक देहांकर ने कहा कि वह पिछले कई वर्षों से वार्ड 17 और उससे जुड़े क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यह इलाका लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ रहा है, लेकिन उन्होंने भाजपा को वहां मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा, “पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुझे आश्वासन दिया था कि उम्मीदवार तय करते समय मेरे नाम पर विचार किया जाएगा, लेकिन अंतिम सूची में मेरा नाम नहीं आया।”
देहांकर ने आगे कहा, “अगर किसी युवा या स्थानीय कार्यकर्ता को टिकट दिया जाता तो मुझे कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन स्थानीय नेता को नजरअंदाज कर बाहर से आए या अन्य वार्ड के नेताओं को टिकट देना निराशाजनक था। मजबूर होकर मुझे निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला करना पड़ा।”
इसी तरह, वार्ड 16 (डी) में भाजपा के वार्ड अध्यक्ष गजानन निशितकर को टिकट नहीं मिलने के बाद करीब 80 पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके समर्थन में इस्तीफा दे दिया। ‘पीटीआई भाषा’ से बातचीत में निशितकर ने कहा कि वह पिछले 30 वर्षों से भाजपा से जुड़े हैं और विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं।
उन्होंने बताया कि 2017 के नगर निगम चुनाव में भी उन्हें टिकट नहीं मिला था, लेकिन उन्होंने उस फैसले को स्वीकार किया था। निशितकर ने कहा, “इस बार मेरा नाम उम्मीदवारों में था, लेकिन टिकट स्थानीय नेता को देने के बजाय दूसरे वार्ड की महिला उम्मीदवार को दे दिया गया। इससे कार्यकर्ताओं में गहरी निराशा है।”
भाजपा के एक अन्य वरिष्ठ नेता और छह बार पार्षद रह चुके सुनील अग्रवाल भी वार्ड 14 से टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। यह सीट एक महिला उम्मीदवार को दी गई है। अग्रवाल ने कहा कि यदि सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होती तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन अनारक्षित सीट पर भी टिकट न मिलना उनके समर्थकों को स्वीकार्य नहीं है।
इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े युवा उद्यमी और खिलाड़ी निनाद दीक्षित भी महल क्षेत्र स्थित वार्ड 22 से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरे हैं। खास बात यह है कि इसी क्षेत्र में आरएसएस का मुख्यालय भी स्थित है।
नागपुर में भाजपा के भीतर उठे इस असंतोष को आगामी नगर निगम चुनावों से पहले पार्टी के लिए बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत

