खारवा, ब्यावर : जिला मुख्यालय पर एकदिवसीय प्रवास सुसम्पन्न कर जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने रविवार को ब्यावर से गतिमान हुए। सर्दी के मौसम में भी आचार्यश्री निरंतर विहार कर रहे हैं। कोहरे से लिपटा प्रातःकाल लोगों को अपने घरों में दुबकने को विवश हैं, वहीं जीवन के सातवें दशक में गतिमान महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी जनकल्याण के लिए निरंतर गतिमान हैं। विहार के दौरान युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की दिगम्बर परंपरा के मुनि आदि आदित्यसागरजी से आध्यात्मिक मिलन हुआ। दो आम्नायों के संतों का आध्यात्मिक मिलन जन-जन को हर्षित कर रहा था। दोनों संतों के मध्य विभिन्न विषयों पर कुछ समय तक वार्तालाप का क्रम रहा। कुछ समय बाद आचार्यश्री महाश्रमणजी पुनः आज के निर्धारित गंतव्य की ओर बढ़ चले।
जनकल्याण के लिए अखण्ड परिव्राजक आचार्यश्री महाश्रमणजी लगभग 17 किलोमीटर का प्रलम्ब विहार कर खरवा गांव में स्थित दिल्ली पब्लिक सेकेण्ड्री स्कूल में पधारे। प्रलम्ब विहार व आध्यात्मिक मिलन के कारण आचार्यश्री दोपहर लगभग एक बजे निर्धारित प्रवास स्थल में पधारे। स्कूल परिसर में आयोजित प्रातःकालीन मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को अध्यात्मवेत्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि मानव अपने जीवन में बोलता है, लिखता है, शरीर से इशारा अथवा संकेत करते हैं। मन में चिंतन, कल्पना, स्मृति करते हैं। इस व्यवहार को माया मलिन बनाने वाली बन सकती है, लेकिन ऋजुता का प्रभाव हो, सरलता हो तो इस व्यवहार को अच्छा बना सकती है। ऋजुता व सरलता मानव जीवन का एक सद्गुण है।
आदमी को निश्छल रहने का प्रयास करना चाहिए। आदमी का व्यवहार निश्छलतामय रहे। आदमी ऋजुता के माध्यम से प्रभुता की ओर बढ़ सकता है। जो आदमी सरल है, जिसके मन, वचन और काय की चेष्टा में एकता हो वह महात्मा और मन में कुछ, वचन में कुछ और व्यवहार में कुछ तो वह आदमी दुरात्मा होता है। जो सरलमना होता है, वह इस संदर्भ में महात्मा होता है। इसलिए आदमी को अपने भीतर सरलतापूर्ण व्यवहार रखने का प्रयास करना चाहिए। जहां तक हो सके, दूसरों को ठगने का प्रयास नहीं रखना चाहिए। सरलता से आदमी का चित्त शांत और सुखद भी हो सकता है। दुनिया में दुर्जन हैं तो सज्जन भी मिलते हैं। आदमी को दुर्जनता से बचने और सज्जनता को अपनाने का प्रयास करना चाहिए। विद्या, धन और शक्ति का सदुपयोग करने का प्रयास हो। बुद्धि के द्वारा किसी दूसरे की समस्या का समाधान होना चाहिए। सरलता के द्वारा शुद्धि भी अच्छी हो सकती है। आदमी को अपने जीवन में ऋजुतापूर्ण व्यवहार करने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री ने मंगल प्रवचन के उपरान्त दिल्ली पब्लिक स्कूल के बच्चों तथा ग्रामवासियों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
डीपीएस स्कूल के निदेशक श्री सुयश तातेड़ ने आचार्यश्री के स्वागत में अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। पत्रकार श्री जयप्रकाश श्रीश्रीमाल ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी।












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